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Kashmir Marathon 2024: सात देश और 120 धावक, पैंगांग झील पर 21 किमी की मैराथन, ग्लोबल वार्मिंग को लेकर किया अलर्ट, जानें आखिर क्या था मकसद

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 21, 2024 16:32 IST

Kashmir Marathon 2024: प्रतिभागियों ने दौड़ की दो श्रेणियों -21 किमी और 10 किमी में भाग लिया। खेल सचिव लद्दाख रविंदर कुमार इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे।

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ठळक मुद्देझील फिलहाल शून्य ये 25 डिग्री नीचे के तापमान के कारण कुछ ही जगहों पर इस बार जम पाई थी।चुशुल निर्वाचन क्षेत्र के पार्षद कोंचोक स्टैनजिन भी थे।मुख्य उद्देश्य तेजी से पिघल रहे हिमालय के ग्लेशियरों के बारे में जागरूकता फैलाना है।

Kashmir Marathon 2024: लगातार दूसरी बार 14 हजार 500 फुट की ऊंचाई पर स्थित दुनिया के सबसे बड़े खारे पानी के समुद्र अर्थात पैंगांग झील पर 21 किमी की मैराथन में दौड़ लगा लगा 7 देशों के 120 धावकों ने लोगों में रोमांच तो भरा ही है, साथ ही दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की है कि ग्लोबल वार्मिंग को अगर अभी नहीं थामा गया तो विनाश होगा। दरअसल यह पहली बार था कि पैंगांग झील पूरी तरह से जम नहीं पाई थी जिसके बावजूद इस पर मैराथन का खतरा मोल लिया गया। सच में आप इस खबर मात्र से ही रोमांच से भर सकते हैं कि कैसे 120 लोगों ने करीब 14500 फुट की ऊंचाई पर स्थित इस झील पर दौड़ लगाई होगी। यह झील फिलहाल शून्य ये 25 डिग्री नीचे के तापमान के कारण कुछ ही जगहों पर इस बार जम पाई थी।

हालांकि चिंता इस बात की व्यक्त की जा रही है कि यह मैराथन इस झील पर आखिरी हो सकती है क्योंकि आशंका है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण आने वाले सालों में यह शायद ही पुनः जम पाए। दुनिया के 7 अलग-अलग देशों के 120 से अधिक धावकों ने मंगलवार को दुनिया की सबसे ऊंची जमी हुई झील मैराथन - पैंगोंग फ्रोजन लेक मैराथन के दूसरे संस्करण में भाग लिया।

प्रतिभागियों ने दौड़ की दो श्रेणियों -21 किमी और 10 किमी में भाग लिया। खेल सचिव लद्दाख रविंदर कुमार इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। उनके साथ चुशुल निर्वाचन क्षेत्र के पार्षद कोंचोक स्टैनजिन भी थे।इस दौड़ के पीछे मुख्य उद्देश्य तेजी से पिघल रहे हिमालय के ग्लेशियरों के बारे में जागरूकता फैलाना है।

इस मैराथन को थिएस्ट्रन टाइटल दिया गया, जिसका अर्थ है कि ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण जमी हुई पैंगोंग झील पर यह आखिरी दौड़ हो सकती है। साथ ही इसके माध्यम से चांगथांग जैसी जगहों पर शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देना है। पैंगोंग के आसपास स्थित गांवों जिनमें मान, मराक, स्पैंगमिक और फोब्रांग शामिल हैं के लोगों ने धावकों की मेजबानी के साथ-साथ इस कार्यक्रम में भाग लिया।

लद्दाख में भारत और चीन के बीच बंटी हुई विश्व प्रसिद्ध पैंगांग झील ने पिछले साल भी जब पहली बार जमी हुई झील मैराथन की मेजबानी की थी तो इस घटनाक्रम का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हो गया था। अधिकारियों के अनुसार, 21 किमी की मैराथन भारत में अपनी तरह की पहली मैराथन थी। 4500 फीट की ऊंचाई पर हुई थी और इतनी ऊंचाई पर दुनिया में होने वाली यह अपनी तरह की पहली मैराथन थी।

पिछले साल इस मैराथन में शामिल होने वाले 75 लोगों ने एक दिवसीय कार्यक्रम के दौरान उस जमी हुई पैंगांग झील पर बर्फ की मोटी तह पर दौड़ लगाई थी जिसके किनारों पर चीन और भारत के करीब दो लाख सैनिक आमने-सामने हैं। आयोजकों का कहना था कि अगर हम इस नजारे पर अभी ध्यान नहीं देंगे तो आने वाली पीढ़ी के लिए यह अतीत बन जाएगा।

इस घटना को दुनिया की सबसे ऊंची जमी हुई झील मैराथन के तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया था। यह हाफ मैराथन लद्दाख के लुकुंग गांव से शुरू होकर मन गांव में समाप्त हुई थी। सभी शामिल होने वालों को मैराथन पूरी करने में साढ़े तीन से 4 घंटों का समय लगा था। दरअसल यह एडवेंचर स्पोर्ट्स फाउंडेशन आफ लद्दाख (एएसएफएल) के दिमाग की उपज थी।

जिसने एक धूमिल वास्तविकता को उजागर करने के लिए इसे ‘द लास्ट रन’ का नाम दिया था। इसके आयोजकों का कहना था कि आने वाले वर्षों मंें दरअसल ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालय के ग्लेशियरों की अनिश्चित स्थिति को देखते हुए, झील के कुछ हिस्से दौड़ के लिए अनुपयुक्त हो सकते हैं।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरसंयुक्त राष्ट्र
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