Karnataka bypolls: Congress-JDS victory and bjp lost | वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉगः कर्नाटक में लिखी गई नई इबारत 
वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉगः कर्नाटक में लिखी गई नई इबारत 

वेदप्रताप वैदिक

माना यह जाता है कि जब भी उपचुनाव होते हैं, सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार प्राय: हार जाते हैं, क्योंकि मतदाताओं की कई हसरतें सरकार तुरंत पूरी नहीं कर पाती है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के उपचुनावों में यही हुआ। लेकिन कर्नाटक के उपचुनावों में नई इबारत लिखी गई। यहां पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतनेवाली भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है।  

भाजपा ने संसद की एक सीट जीती लेकिन वह जीत भी क्या जीत है? वह हार से भी बुरी है। वह सीट थी, शिमोगा की। इस सीट पर भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्नी बी.एस. येदियुरप्पा के बेटे राघवेंद्र की टक्कर थी जनता दल (से) के मधु बंगारप्पा से। 2014 में भाजपा ने यह सीट जीती थी साढ़े तीन लाख वोटों से, लेकिन उनके बेटे को मिली जीत सिर्फ 50 हजार वोटों से। यानी भाजपा के कर्नाटक में सबसे बड़े नेता की सीट पर तीन लाख वोटों का नुकसान हो गया। यह तो हुआ ही, इससे बड़ी बात भी हुई। वह यह कि बेल्लारी, जो कि पिछले 15 साल से भाजपा का गढ़ था, वह भी उसके हाथ से निकल गया। 

बेल्लारी कर्नाटक के कुख्यात थैलीशाह रेड्डी-भाइयों की जागीर-सा बन गया था। भाजपा के इन नेताओं की इच्छा के बिना वहां एक पत्ता भी नहीं खड़क सकता था। लेकिन बेल्लारी में कांग्रेस उम्मीदवार को साढ़े पांच लाख वोट मिले हैं। 15 साल पुराना भाजपा का यह गढ़ ढह गया। 

मांड्या लोकसभा सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार के मुकाबले जनता दल (से) का उम्मीदवार साढ़े पांच लाख वोट से जीता है। यानी शिमोगा में भाजपा की जीत जितने वोटों से हुई, उससे दस गुना ज्यादा वोटों से कांग्रेस और जनता दल (से) की जीत बेल्लारी और मांड्या से हुई। कर्नाटक के उप-चुनावों का संदेश यह है कि देश के सभी प्रांतीय और अखिल भारतीय दल यदि महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ें तो भाजपा को 2019 में 100 सीटें मिलना भी मुश्किल हो जाएगा। 


Web Title: Karnataka bypolls: Congress-JDS victory and bjp lost
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