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Karnataka Assembly Elections: कर्नाटक भाजपा में टिकट को लेकर विद्रोह, कई नेता नाराज, विधान पार्षद आर शंकर ने दिया इस्तीफा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 12, 2023 21:42 IST

Karnataka Assembly Elections: आर शंकर कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होरात्ती के कार्यालय गए और उन्होंने हाथ से लिखा हुआ अपना इस्तीफा सौंप दिया।

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ठळक मुद्दे2019 में कर्नाटक विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था और विधान परिषद के लिए चुना गया था।शंकर रानेबेन्नूर से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक थे, लेकिन पार्टी ने अरुण कुमार पुजार को टिकट दिया है।आर शंकर के टिकट के अनुरोध को पार्टी ने एक दिन पहले ही खारिज कर दिया था।

Karnataka Assembly Elections: कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं मिलने से नाराज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान पार्षद आर शंकर ने बुधवार को विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया। आर शंकर के टिकट के अनुरोध को पार्टी ने एक दिन पहले ही खारिज कर दिया था।

आर शंकर कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होरात्ती के कार्यालय गए और उन्होंने हाथ से लिखा हुआ अपना इस्तीफा सौंप दिया। गौरतलब है कि शंकर विपक्ष के उन 17 विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने राज्य में 2019 में कांग्रेस-जनता दल (सेक्युलर) के गठबंधन वाली सरकार को गिराने में भाजपा की मदद की थी।

बाद में शंकर को 2019 में कर्नाटक विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था और विधान परिषद के लिए चुना गया था। शंकर रानेबेन्नूर से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक थे, लेकिन पार्टी ने अरुण कुमार पुजार को टिकट दिया है। आर शंकर ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ कहीं न कहीं मुझे इस बात का दुख है कि मैं इस मुकाम पर इसलिए पहुंचा क्योंकि मैंने भाजपा का पक्ष लिया।

मैं अपने तालुक के लोगों की सेवा कर सकता था, लेकिन मुझे वह अवसर नहीं मिला। ’’ उन्होंने कहा कि वह उन लोगों में से थे जिन्होंने ‘‘कर्नाटक में भाजपा सरकार को बनाने में अहम योगदान दिया लेकिन उन्हीं लोगों की बलि दी जा रही है।’’ उन्होंने कहा कि अगर वह फिर से विधानसभा चुनाव लड़ते हैं तो उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोग उनका समर्थन करने के लिए तैयार हैं।

शंकर ने अपने मतदाताओं के फैसले पर टिके नहीं रहने की गलती पर पश्चाताप व्यक्त करते हुए कहा कि वह ‘‘इसे सुधारना चाहते हैं और रानेबेन्नूर के लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना चाहते हैं’’। शंकर ने कहा, ‘‘ मैं और तीन साल के लिए एमएलसी रह सकता था। मैं अपने कार्यकर्ताओं की मदद करने, लोगों को बोरवेल, घर दिलाने या अधिकारियों को स्थानांतरित करने में सक्षम नहीं था।

विकट स्थिति में रहते हुए राजनीति करना मजबूरी थी। आज मुझे आजादी मिली है। मैं अब एक आजाद पंछी हूं। ’’ गौरतलब है कि शंकर 2018 में रानेबेन्नूर निर्वाचन क्षेत्र से कर्नाटक प्रज्ञावंत जनता पार्टी (केपीजेपी) के एकमात्र विधायक के रूप में चुने गए थे, बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 

टॅग्स :कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023BJPकांग्रेस
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