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जोशीमठ संकट: 603 घरों में दरार, 55 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, पीड़ित परिवारों से मिलकर भावुक हुए सीएम धामी

By अनिल शर्मा | Updated: January 8, 2023 09:34 IST

सीएम धामी ने यह भी कहा, "हम इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि क्या लोगों को यहां से पलायन करने और पुनर्वास करने की आवश्यकता है। हम इसके लिए एक स्थान भी ढूंढ रहे हैं।

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ठळक मुद्देजोशीमठ में 11 और परिवारों को शनिवार को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। शहर में दरार से प्रभावित घरों की संख्या बढ़कर 603 हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए शनिवार को जोशीमठ का दौरा किया।

गोपेश्वरः जोशीमठ में 11 और परिवारों को शनिवार को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। चमोली जिला प्रशासन के मुताबिक 55 परिवारों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। शहर में दरार से प्रभावित घरों की संख्या बढ़कर 603 हो गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। चमोली के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एन.के. जोशी ने कहा कि दरार के कारण 11 और घरों में रहने वाले परिवारों को अस्थायी राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया है।

लगभग 600 प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर भेजे जाने का निर्देश देने के एक दिन बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए शनिवार को जोशीमठ का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने उन घरों का भी दौरा किया, जिनकी दीवारों और छत में चौड़ी दरारें आ गई हैं। 

धामी प्रभावित परिवारों से मिलने के दौरान भावुक हो गए। उन्होंने वृद्धों से लेकर उम्र भर के लोगों से मुलाकात की। बच्चों को अपनी समस्याओं से रूबरू कराना। मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी कोशिश सभी को सुरक्षित बनाने की है. जरूरी इंतजाम के लिए तैयारियां की जा रही हैं। हमारा पहला काम लोगों को सुरक्षित इलाकों में पहुंचाना है।"

सीएम धामी ने यह भी कहा, "हम इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि क्या लोगों को यहां से पलायन करने और पुनर्वास करने की आवश्यकता है। हम इसके लिए एक स्थान भी ढूंढ रहे हैं। अभी तक यह सर्दियों का मौसम है। इस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।'' मुख्यमंत्री ने बताया कि आईआईटी रुड़की जैसे प्रमुख संस्थान और  इसरो के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि कारण का पता लगाया जा सके।

बकौल सीएम धामी- "भूवैज्ञानिक काम कर रहे हैं। गुवाहाटी संस्थान के अलावा, आईआईटी रुड़की भी इसरो के साथ बातचीत कर रहा है। हर कोई कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहा है।"

गौरतलब है कि जोशीमठ कस्बे में घरों, सड़कों और खेतों में भारी दरारें देखी गई हैं और कई घर धराशायी हो गए हैं। जोशीमठ में भूस्खलन के कारण भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाली जोशीमठ-मलारी सीमा सड़क पर कई स्थानों पर दरारें पाई गई हैं। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा भी भूस्खलन की चपेट में है।

भाषा इनपुट के साथ

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