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JNU में भारत विरोधी नारेबाजी मामला: टीवी संपादक की अर्जी पर CIC ने केजरीवाल सरकार को किया जवाब तलब

By भाषा | Updated: August 22, 2018 18:31 IST

केंद्रीय सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद ने वसंत विहार के एसडीएम को सूचना मुहैया करने का निर्देश देते हुए एक कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि 30 दिनों के अंदर सूचना नहीं देने को लेकर क्यों नहीं अधिकारी पर जुर्माना लगाया जाए। 

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नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि फरवरी 2016 में जेएनयू में हुए प्रदर्शन का, छेड़छाड़ किया हुआ वीडियो कथित तौर पर प्रसारित करने को लेकर तीन समाचार चैनलों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने में यदि उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था, तो वह उसका खुलासा करे।

केंद्रीय सूचना आयुक्त यशोवर्द्धन आजाद ने एक चैनल के संपादक की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। अर्जी के जरिए संपादक ने सरकार की ओर से आपराधिक शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, ‘फाइल नोटिंग’ के साथ शिकायत दर्ज कराने की इजाजत देने के दिल्ली सरकार के प्राधिकार को जानना चाहा है।

अर्जी दिल्ली सरकार के कार्यालयों में हस्तांतरित की गई लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। 

आजाद ने इस बात का जिक्र किया कि संपादक को यह जानने का न्यायोचित अधिकार है कि किस तथ्य, तथ्य को प्राप्त करने वाली जांच के आधार पर और किनके निर्देश पर एसडीएम ने उनके एवं अन्य पत्रकारों के खिलाफ मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत का रूख किया।

उन्होंने कहा कि यदि प्रतिवादियों के मुताबिक वादी और अन्य लोग खबरों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग नहीं कर रहे थे, तो प्रतिवादियों को सूचना साझा करना था। 

आजाद ने इस बात का जिक्र किया कि सूचना देने से मना करने के इस उदाहरण का लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के मनोबल पर सीधा असर पड़ेगा। इस तरह के मामलों में विलंब करने या सूचना देने से मना करने पर संदेह पैदा होता है। 

आजाद ने वसंत विहार के एसडीएम को सूचना मुहैया करने का निर्देश देते हुए एक कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि 30 दिनों के अंदर सूचना नहीं देने को लेकर क्यों नहीं अधिकारी पर जुर्माना लगाया जाए। 

गौरतलब है कि यह मामला जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में नौ फरवरी 2016 को छात्रों के प्रदर्शन का कथित तौर पर छेड़छाड़ किया हुआ वीडियो तीन समाचार चैनलों द्वारा प्रसारित करने का है। 

प्रदर्शनकारी संसद हमलों के दोषी अफजल गुरू को दी गई फांसी की सजा का कथित तौर पर विरोध कर रहे थे। 

प्रदर्शन के वीडियो के प्रसारण से समाज के बड़े हिस्से में रोष छा गया, जिसके बाद विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों की गिरफ्तारी भी हुई थी।  

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