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झारखंड में बिखरा NDA और महागठबंधन, जानें पूरा राजनीतिक समीकरण

By एस पी सिन्हा | Updated: November 30, 2019 08:59 IST

झारखंड विकास मोर्चा और वामदल भी रणकौशल दिखाएंगे. कौन इस चुनाव में परास्त होगा और किसके सिर जीत का सेहरा बंधेगा, इसके लिए अभी से चर्चा शुरू हो गई है.

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ठळक मुद्देझारखंड में केवल झाविमो पहली ऐसी पार्टी है, जिसने सभी 81 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं.आजसू के दिल मांगे मोर की आवाज के चलते एनडीए बिखर गया.

झारखंड में चुनावी रण जीतने के लिए सेनाएं मैदान में मोर्चा संभाले हुए हैं. मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच हो रहा है. झारखंड विकास मोर्चा और वामदल भी रणकौशल दिखाएंगे. कौन इस चुनाव में परास्त होगा और किसके सिर जीत का सेहरा बंधेगा, इसके लिए अभी से चर्चा शुरू हो गई है. महागठबंधन का स्वरूप अभी मोटे तौर पर ही उभरा है.

एनडीए की तस्वीर भी इस समय साफ नहीं है. आजसू के दिल मांगे मोर की आवाज के चलते एनडीए बिखर गया. अभी हालात ये है कि भाजपा भले हीं सत्तारूढ़ दल होने का दावा कर ले, लेकिन वह झारखंड के सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने का हिम्मत नही कर सकी.

झारखंड में केवल झाविमो पहली ऐसी पार्टी है, जिसने सभी 81 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. झाविमो के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी खुद राजधनवार से चुनाव लड़ रहे हैं. अब तक पार्टियों द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार भाजपा ने 79 सीट पर प्रत्याशी उतारा है. एक सीट हुसैनाबाद पर निर्दलीय प्रत्याशी विनोद सिंह को भाजपा ने समर्थन दिया है. वहीं सिल्ली सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारा है. आजसू द्वारा अब तक 52 सीट पर प्रत्याशियों की घोषणा की गई है.

झामुमो ने 43 सीट पर प्रत्याशी दिया है. झामुमो के साथ गठबंधन में शामिल कांग्रेस ने 31 सीट पर प्रत्याशी उतारा है. जदयू द्वारा 38 सीट पर प्रत्याशी दिया गया है. राजद ने सात सीट पर प्रत्याशी दिया है. झामुमो उलगुलान ने 18 सीट और बसपा ने 61 सीट और सपा ने 22 सीटों पर प्रत्याशी दिया है. वामदल व अन्य पार्टियों ने भी औसतन 20 से 25 सीटों पर ही प्रत्याशी दिया है. झाविमो की प्रवक्ता सुनीता सिंह ने कहा है कि पार्टी ने राज्य की सभी 81 विधानसभा सीटों से अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है. झाविमो ने टिकट बंटवारे में सभी वगार्ें का ख्याल रखा है.

खासकर महिलाओं, युवाओं और अल्पसंख्यक उम्मीदवार को टिकट देने में झाविमो सभी पार्टियों से अव्वल साबित हुई है. 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 37 ने आजसू के पांच विधायकों के दम पर बहुमत का आंकड़ा पार किया था. अब आजसू को गठबंधन के भागीदार के रूप में सीटें शेयर करनी होगी. पिछले विधानसभा चुनाव में आजसू ने 8 सीटों पर और भाजपा ने 72 सीटों पर चुनाव लड़ा था. अब 2019 के विधानसभा चुनाव में आजसू ज्यादा हिस्सेदारी मांगने के कारण दोस्ती में दरार आ गई.

2019 चुनाव के ठीक पहले छह और विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं. इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के तीन और कांग्रेस दो विधायक शामिल हैं. एक विधायक नौजवान संघर्ष मोर्चा के भानुप्रताप शाही हैं. भाजपा आने वाले विधायकों को अपने लिए फायदेमंद मान रही है. महागठबंधन के तहत झारखंड मुक्तिमोर्चा, कांग्रेस और राजद मिल कर चुनाव लड़ रही है. सबसे बड़ी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा है, इसलिए वह बिना किसी विवाद के ड्राइविंग सीट पर है.

मरांडी की पार्टी से महागठबंधन को नुकसान होने की आशंका बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा को आया राम, गया राम की राजनीति से बहुत नुकसान हुआ है. अब उन्होंने भी लोहा से लोहा काटने की रणनीति बनाई है. हरियाणा में जिस तरह दुष्यंत चौटाला को भाजपा और कांग्रेस के बागियों ने फायदा पहुंचाया था, उसी तरह झारखंड में मरांडी को भी बागियों से लाभ मिल सकता है. मरांडी का अपना जनाधार भी है. उनके अलग चुनाव लड़ने से जनता के सामने तीसरा विकल्प भी होगा. जबकि मरांडी के अलग होने से महागठबंधन को नुकसान होने की आशंका है.

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