Jammu-Kashmir Weather: बर्फ और बारिश की कमीसे जूझ रहे कश्मीर के लिए एक और मुसीबत तेजी से बढ़ता तापमान है। मोसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बर्फ या बारिश की अनुपस्थिति में कश्मीर में फूल जल्दी खिलेंगें और ग्लेशियर तेजी से पिघलेंगें क्योंकि तेज होती गर्मी का तापमान नया रिकार्ड बना सकता है।
दरअसल जम्मू कश्मीर में चल रहे सूखे के दौर में बाकी महीने बारिश या बर्फबारी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इससे बारिश में काफी कमी आने की संभावना है, जिससे मौसमी बारिश की कमी और बढ़ जाएगी।
मौसम विभाग श्रीनगर के डायरेक्टर, डा मुख्तार अहमद कहते थे कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में कुल मिलाकर मौसम ज्यादातर शांत रहेगा, सिवाय कुछ खास दिनों में ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में हल्की बर्फबारी के।
मौसम की भविष्यवाणी के मुताबिक, 17 फरवरी को ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में हल्की बर्फबारी की संभावना है। 18 से 24 फरवरी तक मौसम ज्यादातर सूखा रहने की संभावना है।
जबकि 25 और 26 फरवरी को आसमान में हल्के से लेकर आमतौर पर बादल छाए रह सकते हैं। 27 और 28 फरवरी के बीच, मौसम में हल्के से लेकर आमतौर पर बादल छाए रहने की उम्मीद है, और कुछ ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना है, खासकर 28 फरवरी की शाम या रात में। इसी तरह से 1 और 2 मार्च के लिए, मौसम विभाग ने आमतौर पर बादल छाए रहने और कुछ ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी का अनुमान लगाया है।
मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि मौसम अच्छा रहने पर वे खेती का काम जारी रखें। उसने यह भी कहा कि आने वाले हफ्ते में इलाके के ज्यादातर हिस्सों में मिनिमम और मैक्सिमम टेम्परेचर में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने की संभावना है।
दिन का टेम्परेचर लगातार नार्मल से ऊपर रहने की उम्मीद है, और अगर चल रही गर्मी तेज होती है, तो कुछ तापमान रिकार्ड भी टूट सकते हैं। सर्दियों के आखिर में ऐसी गर्मी कई इलाकों में पेड़ों में जल्दी फूल खिलने का माहौल बना रही है।
हालांकि, लंबे समय तक गर्मी में जल्दी फूल खिलने का खतरा रहता है। अगर मार्च के दौरान ताजा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस इलाके पर असर डालता है, तो माहौल में अभी भी ठंड वापस आने की संभावना है। फूल खिलने के समय अचानक ठंड या देर से पाला पड़ने से फूलों और फल देने वाले पेड़ों को नुकसान हो सकता है, जिससे बागवानी पर असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग कहता था कि इसके अलावा, ज्यादा तापमान से ग्लेशियर और बर्फ पिघलने की रफतार तेज हो सकती है, जिससे नदियों और झरनों में पानी का बहाव कुछ समय के लिए बढ़ सकता है। हालांकि इससे कुछ समय के लिए पानी का लेवल बढ़ सकता है, लेकिन मार्च तक लगातार सूखे की स्थिति धान की खेती पर बुरा असर डाल सकती है, खासकर अगर बुआई से पहले के जरूरी समय में नदियों और झरनों से पानी का बहाव कम हो जाए।