jammu kashmir 'Darbar move' not happen Srinagar this time decision taken due to corona epidemic | श्रीनगर में इस बार नहीं होगा ‘दरबार मूव’, कोरोना महामारी के कारण लिया गया फैसला, जानें इसके बारे में रोचक बातें...
वर्तमान में साल में दो बार दरबार मूव की प्रकिया पर करीब एक हजार करोड़ रुपये का खर्च आता है। (file photo)

Highlightsजम्मू कश्मीर में ‘दरबार मूव’ अर्थात प्रत्येक 6 माह बाद राजधानी बदलने की प्रकिया 148 साल पुरानी है।वर्ष 1872 में दरबार को छह महीने श्रीनगर व छह महीने जम्मू में रखने की प्रथा शुरू की थी।व्यवस्था को डोगरा शासकों ने वर्ष 1947 तक जारी रखा।

जम्मूः कोरोना महामारी के कारण जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने फैसला किया है। जो ‘दरबार मूव’ की परंपरा 148 सालों में भी कभी नहीं रूकी थी, उसे अब दूसरी बार कोरोना ने रोक दिया है।

इस साल यह पूरी तरह से टाल दिया गया है जबकि पिछले साल इसे स्थगित करने के बाद 3 महीनों के उपरांत कश्मीर में दरबार खुला था। दरअसल कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सरकार ने इस बार गर्मियों में होने वाले दरबार मूव के फैसले को स्थगित करने का निर्णय लिया है। इससे पहले जम्मू में सरकार का दरबार 30 अप्रैल को बंद होकर श्रीनगर में 20 मई को शुरू होना था।

आज 15 अप्रैल से जम्मू सचिवालय में ई आफिस व्यवस्था भी शुरू हो चुकी है। इससे अब सारी फाइलों को डिजिटल स्वरूप दिया गया है। सरकार की ओर से जम्मू कश्मीर में ई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए गत 12 अप्रैल को सरकारी विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग भी पूरी कर ली गई थी।

इसमें जम्मू कश्मीर नागरिक सचिवालय के करीब दो हजार से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों ने भाग लिया था। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि इस बार दरबार मूव को श्रीनगर ले जाते समय फाइलों के भारी बोझ को जम्मू में ही छोड़ देना था जबकि कुछ विभागों की गोपनीय फाइल को दरबार मूव क साथ ले जाने की योजना थी।

एलजी कार्यालय की ओर से ट्वीट करते हुए इस बात की जानकारी दी गई है कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने दरबार मूव के फैसले को इस बार स्थगित करने का निर्णय लिया है। चूंकि अब ई आफिस व्यवस्था शुरू हो चुकी है।

ऐसे में जम्मू और श्रीनगर में स्थित नागरिक सचिवालय में कामकाज प्रभावित नहीं होगा और दोनों जगह पर नागरिक सचिवालय का कामकाज सुचारू रहेगा। वैसे जम्मू कश्मीर में यह मांग बड़ी पुरानी है कि दोनों राजधानियों जम्मू व श्रीनगर में सचिवालय का काम पूरा साल चलता रहे। सिर्फ वरिष्ठ अधिकारी ही मूव करें। हर छह माह बाद न रिकार्ड को शिफ्ट किया जाए और न ही कर्मचारियों को।

इससे स्थानीय लोगों को कामकज करवाने में आसानी के साथ सरकार का खर्च भी बचेगा। पर हिंसा, आतंकवाद और राज्य से केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की कवायद भी ऐसा नहीं कर पाई पर कोरोना ने एक झटके में दूसरी बार अब प्रशासन को 148 सालों की रिवायत को बदलने पर मजबूर कर दिया है।

यह बात अलग है कि इसका विरोध भी होने लगा है। कोरोना ने जम्मू कश्मीर में 148 वर्ष पुरानी दरबार मूव की व्यवस्था में बदलाव करवा दिया है। फिलहाल शीतकालीन राजधानी जम्मू में दरबार बंद नहीं होगा।जानकारी के लिए जम्मू कश्मीर में ‘दरबार मूव’ अर्थात प्रत्येक 6 माह बाद राजधानी बदलने की प्रकिया 148 साल पुरानी है।

डोगरा शासक महाराजा रणबीर सिंह ने बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के लिए वर्ष 1872 में दरबार को छह महीने श्रीनगर व छह महीने जम्मू में रखने की प्रथा शुरू की थी। महाराजा का काफिला अप्रैल में श्रीनगर के लिए रवाना हो जाता था और वापसी अक्टूबर में होती थी। इस व्यवस्था को डोगरा शासकों ने वर्ष 1947 तक जारी रखा। वर्तमान में साल में दो बार दरबार मूव की प्रकिया पर करीब एक हजार करोड़ रुपये का खर्च आता है।

Web Title: jammu kashmir 'Darbar move' not happen Srinagar this time decision taken due to corona epidemic

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