Jammu and Kashmir: Pakistani Army engaged in preparations for Border Raiders attacks, Indian commandos deployed at LOC | जम्मू-कश्मीर: बार्डर रेडर्स के हमलों की तैयारी में जुटी पाकिस्तानी सेना, LOC पर भारतीय कमांडों तैनात
जम्मू-कश्मीर: बार्डर रेडर्स के हमलों की तैयारी में जुटी पाकिस्तानी सेना, LOC पर भारतीय कमांडों तैनात

भारतीय सेना ने एलअेासी पर स्थित अपनी कई सीमा चौकिओं पर अपने कमांडों की तैनाती की है। यह तैनाती उन सूचनाओं के बाद की गई है जिसमें कहा गया है कि पाक सेना एलओसी पर बार्डर रेडर्स के सदस्यों के जरिए कमांडों कार्रवाईयों को अंजाम देना चाहती है। इसके साथ-साथ वह सीजफायर के उल्लंघन को भी बढ़ाते हुए घुसपैठ को तेज कर चुकी है।

पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम के उल्लंघन में हुई हालिया बढ़ोतरी के कारण जम्मू कश्मीर में एलओसी से सटे इलाकों में बढ़े तनाव के बीच सेना ने आज बताया कि उन्हें प्राप्त सूचना के मुताबिक, पाकिस्तान एलओसी पर और अधिक कमांडो हमले की कोशिश कर रहा है.

बार्डर रेडर्स के नाम से जाने जाने वाले यह कमांडों पाकिस्तान के विशेष बलों के कर्मियों और आतंकियों का एक मिलाजुला स्वरुप है। पिछले कुछ सालों में पाक बार्डर रेडर्स भारत के कई सैनिकों की नृशंस हत्या कर चुका है। कईयो के वह सिर भी काट कर ले जा चुका है।

वैसे एलओसी पर बार्डर रेडर्स के हमले कोई नए नहीं हैं। इन हमलों के पीछे का मकसद हमेशा ही भातीय सीमा चौकिओं पर कब्जा जमाना रहा है। पाकिस्तानी सेना की कोशिश कोई नई नहीं है। करगिल युद्ध की समाप्ति के बाद हार से बौखलाई पाकिस्तानी सेना ने बार्डर रेडर्स टीम का गठन कर एलओसी पर ऐसी बीसियों कमांडों कार्रवाईयां करके भारतीय सेना को जबरदस्त क्षति सहन करने को मजबूर किया है।

26 जुलाई 1999 को जब करगिल युद्ध की समाप्ति की घोषणा हुई तो उधर पाक सेना ने अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देना आरंभ कर दिया था। उसने त्रिस्तरीय रणनीति बनाई जिसके पीछे का मकसद भारतीय सेना को अधिक से अधिक नुक्सान पहुंचाना तो था ही कश्मीर में भी लोग त्राहि-त्राहि कर उठे थे।

करगिल युद्ध के बाद ही फिदायीनों, मानव बमों के हमलों की भी शुरूआत हुई थी। साथ ही शुरूआत हुई थी भारतीय सीमा चौकिओं पर बार्डर रेडर्स के हमलों की। हालांकि सैन्य सूत्र कहते हैं कि पाक सेना द्वारा गठित बार्डर रेडर्स में आतंकी भी शामिल होते हैं जिन्हें हमलों में इसलिए शामिल किया जाता रहा है ताकि वे कश्मीर में घुसने के बाद वहशी कृत्यों को अंजाम दे सकें।

पिछले 20 सालों में कितनी बार पाक सेना के बार्डर रेडर्स ने भारतीय सीमा चौकिओं पर हमले किए कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है। एक सैन्य सूत्र के मुताबिक:‘भारतीय सैनिक नपंसुक तो नहीं हैं पर उन्हें ऐसा बना दिया गया है जिन्हें आज भी एलओसी पार कर पाक सेना को जैसे को तैसा का सबक सिखाने की खुली अनुमति कभी नहीं मिली है।’ सिवाय एक बार बार हमला करने के।

इतना जरूर था कि बार्डर रेडर्स के हमले ज्यादातर एलओसी के इलाकों में ही हुए थे। इंटरनेशनल बार्डर पर पाक सेना ऐसी हिम्मत नहीं दिखा पाई थी। जबकि राजौरी और पुंछ के इलाके ही बार्डर रेडर्स के हमलों से सबसे अधिक त्रस्त इसलिए भी रहे थे क्योंकि एलओसी से सटे इन दोनों जिलों में कई फारवर्ड पोस्टों तक पहुंच पाना दिन के उजाले में संभव इसलिए नहीं होता था क्योंकि पाक सेना की बंदूकें आग बरसाती रहती थी।

बार्डर रेडर्स के हमलों को कश्मीर सीमा पर स्थित सैन्य पोस्टों में तैनात जवानों ने भी सीजफायर से पहले की अवधि में सहन किया है। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय इलाके में घुस कर भारतीय जवानों के सिर काट कर ले जाने की  घटनाआंे को भी इन्हीं बार्डर रेडर्स ने अंजाम दिया था। जबकि 11 साल पहले उड़ी की एक उस पोस्ट पर कब्जे की लड़ाई में भारतीय वायुसेना को भी शामिल करना पड़ा था जिसे भारतीय सैनिकों ने भयानक सर्दी के कारण खाली छोड़ दिया था।


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