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भारत के जलशक्ति मंत्री ने कहा- पाकिस्तान को जाने वाला पानी रोकना हमारी प्राथमिकता

By रोहित कुमार पोरवाल | Updated: August 21, 2019 19:29 IST

भारत के जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिह शेखावत ने कहा है कि पाकिस्तान को जाने वाला पानी रोकना प्रथामिकता में है।

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ठळक मुद्देजलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पाकिस्तान की ओर जाना वाला भारत का पानी रोकना प्राथमिकता में है।सिंधु जल संधि के तहत भारत के पानी का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान को जाता है।

भारत के जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिह शेखावत ने कहा है कि पाकिस्तान को जाने वाला पानी रोकना प्रथामिकता में है। उन्होंने बुधवार (21 अगस्त) को कहा, ''भारत अब प्राथमिकता के आधार पर यह देख रहा है कि सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को जाने वाला कितना पानी रोक सकता है।'' 

जलशक्ति मंत्री शेखावत ने कहा, ''सिंधु जल समझौते के तहत भारत के पानी का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान को जाता है। रावी, ब्यास और सतलुज के इस सिस्टम में कई सहायक नदियों का पानी आता है और जहां यह इकट्ठा होता है वहां से दूसरी ओर जाता है। हम इस प्राथमिकता के साथ काम कर रहे हैं कि पानी का जो हमारा हिस्सा  पाकिस्तान की ओर जाता है, कैसे उसे हमारे किसानों, उद्योगों और लोगों के लिए मोड़ा जा सके।''   

उन्होंने कहा, ''हम हाइड्रोलॉजिकल और तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन पर काम कर रहे हैं। मैंने निर्देश दिया है कि इसे तुरंत किया जाए ताकि हम अपनी योजनाओं को अमल में ला सकें।''

शेखावत का बयान ऐसे समय आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तल्खी चरम पर है। बता दें कि पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने संशोधित किया था, जिसके बाद से पाकिस्तान लगातार बौखलाहट जाहिर कर रहा है। पाकिस्तान लगातार कश्मीर को मुद्दा बनाकर उसमें अंतर्राष्ट्रीय दखल की गुहार लगा रहा है। हालांकि, विश्व समुदाय से उसे कोई मदद नहीं मिली है।

बीती मई में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी ऐसा बयान दे चुके हैं। गडकरी ने कहा था कि जिस प्रकार पड़ोसी मुल्क लगातार आतंकवाद को समर्थन दे रहा है, उसे देखते हुए भारत विचार कर रहा है कि पाकिस्तान की ओर जाने वाले नदी के पानी को रोक दिया जाए।

बता दें कि 1960 में सिंधु जल समझौते पर भारत के पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे।

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