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जयशंकर ने एससीओ के सदस्य देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में लिया हिस्सा

By भाषा | Updated: July 14, 2021 14:21 IST

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नयी दिल्ली, 14 जुलाई विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद और उग्रवाद का मुकाबला करना शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का प्रमुख उद्देश्य है और इसे आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकना चाहिए।

भारत, चीन, पाकिस्तान और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के पांच अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ तजाकिस्तान की राजधानी दुशांबे में समूह की एक महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने यह बयान दिया।

जयशंकर ने अफगानिस्तान की स्थिति के साथ-साथ जन स्वास्थ्य और आर्थिक सुधार को क्षेत्र के समक्ष पेश होने वाली परेशानियों का भी जिक्र किया।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद भी इस बैठक में शामिल हुए।

जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ दुशांबे में एससीओ के एफएमएफ को आज सुबह संबोधित किया। अफगानिस्तान, जन स्वास्थ्य और आर्थिक सुधार प्रमुख मुद्दे हैं। आतंकवाद और उग्रवाद का मुकाबला करना एससीओ का प्रमुख उद्देश्य है। आतंकवाद के वित्तपोषण और डिजिटल सुविधा को रोकना चाहिए ।’’

विदेश मंत्री ने ‘‘एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य’’ के संदेश को भी रेखांकित किया और कोविड-19 वैश्विक महामारी से निपटने के लिए विश्व के जल्द से जल्द टीकाकरण का आह्वान किया। जयशंकर ने कहा कि उन्होंने बहुपक्षवाद में सुधार पर भी बात की और इस क्षेत्र को फिर से जीवंत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

इससे पहले जयशंकर ने ट्वीट किया था, ‘‘ एससीओ एफएमएम की शुरुआत। संगठन की 20वीं वर्षगांठ की उपलब्धियों पर चिंतन करने और चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने का एक उपयुक्त समय है। अफगानिस्तान और कोविड-19 के प्रभावों से निपटने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।’’

अफगानिस्तान में पिछले कुछ सप्ताह में कई हमले हुए हैं, ये हमले ऐसे समय में हो रहे हैं जब अमेरिका अगस्त के अंत तक युद्धग्रस्त देश से अपने सभी सैनिक वापस बुला लेगा। ऐसे में अफगानिस्तान में बढ़ती हिंसा विश्व स्तर पर चिंता का एक विषय बन गई है।

भारत और पाकिस्तान वर्ष 2017 में एससीओ के स्थायी सदस्य बने थे। भारत और पाकिस्तान के अलावा आठ सदस्यीय एससीओ में रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं।

एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में रूस, चीन, किर्गिज गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा एक शिखर सम्मेलन में की गई थी।

भारत ने एससीओ और इसके क्षेत्रीय आतंकवाद-निरोधी ढांचे (आरएटीएस) के साथ अपने सुरक्षा संबंधी सहयोग को गहरा करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है, जो विशेष रूप से सुरक्षा तथा रक्षा से जुड़े मुद्दों से संबंधित है। भारत को 2005 में एससीओ में एक पर्यवेक्षक बनाया गया था और वह समूह की मंत्री स्तरीय बैठकों में भी भाग लेता रहा है, जो मुख्य रूप से यूरेशियन क्षेत्र में सुरक्षा तथा आर्थिक सहयोग पर केन्द्रित है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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