लाइव न्यूज़ :

राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष से वसुंधरा राजे को दूर करना आसान नहीं!

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: January 7, 2019 07:16 IST

दिल्ली में पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक में राजस्थान के लिए नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर चर्चा तो हुई थी, परंतु बगैर इस पर गंभीर चर्चा के कोई फैसला लेना ठीक नहीं माना गया. याद रहे, वसुंधरा राजे की सहमति के बगैर इस पर कोई भी एकतरफा निर्णय सियासी तूफान ला सकता है.

Open in App

राजस्थान में विस चुनाव हारने के बाद भाजपा सदन में मुख्य विपक्षी दल है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष चुनना आसान नहीं है, यही वजह है कि इतना समय गुजर जाने के बाद भी इस संबंध में कोई निर्णय नहीं हो पाया है.यदि राजे चुनाव हार जाती तो राजस्थान की सियासी समीकरण बदल जाती, किंतु अब उन्हें नजरअंदाज करके कोई फैसला लेना संभव नहीं है.

खबर है कि दिल्ली में पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक में राजस्थान के लिए नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर चर्चा तो हुई थी, परंतु बगैर इस पर गंभीर चर्चा के कोई फैसला लेना ठीक नहीं माना गया. याद रहे, वसुंधरा राजे की सहमति के बगैर इस पर कोई भी एकतरफा निर्णय सियासी तूफान ला सकता है.

प्रदेश अध्यक्ष के मामले में ऐसा पहले हो चुका है. नेता प्रतिपक्ष पर चल रही चर्चाओं में वसुंधरा राजे का नाम सबसे आगे है, किंतु भविष्य की राजनीति के मद्देनजर केंद्रीय नेतृत्व इस पर शायद ही तैयार हो, और इसीलिए राजे के अलावा गुलाबचंद कटारिया, राजेंद्र सिंह राठौड़, वासुदेव देवनानी, नरपत सिंह राजवी आदि के नाम भी चर्चा में हैं.

हालांकि, इस मुद्दे पर अभी तक कोई विवाद नहीं है, लेकिन राजे को किनारे करके कोई फैसला करना विवाद को न्यौता देना होगा. इसका एक तरीका यह निकाला जा रहा है कि सभी भाजपा एमएलए की राय ली जाए और उसके आधार पर नेता प्रतिपक्ष चुना जाए.

ऐसे संकेत भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी भी दे चुके हैं, जिसके अनुसार- प्रतिपक्ष का नेता तय करने के लिए केंद्रीय मंत्री अरु ण जेटली और भाजपा के प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है, जो जल्दी ही जयपुर आएंगे और विधायक दल बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष के नाम की घोषणा होगी. राजे को पहले सम्मानजनक पद देना होगा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि केंद्रीय नेतृत्व राजे को यह पद नहीं देना चाहता है, तो उसे पहले राजे को इससे बड़ा और सम्मानजनक पद देना होगा, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या इसके लिए राजे तैयार होंगी?

क्योंकि, ऐसा करने का सियासी मकसद राजे के हाथ से राजस्थान की कमान लेना होगा! सियासी सारांश यही है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व बगैर सियासी विवाद के अपनी मर्जी का नेता प्रतिपक्ष बनाना तो चाहता है, लेकिन अभी इसकी राह आसान नहीं है.

टॅग्स :वसुंधरा राजेराजस्थान
Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टपत्नी की गला रेतकर हत्या और पति ने खुद को चाकू से वार कर आत्महत्या का किया प्रयास

क्राइम अलर्टराजस्थान सड़क हादसाः पुलिस उपनिरीक्षक सहित 4 लोगों की मौत, भरतपुर में तेज रफ्तार कार ने 3 को कुचला

भारतबोर्ड एग्जाम में उसने 93.88% अंक हासिल किए थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था, राजस्थान की मेधावी छात्रा की हुई मौत

बॉलीवुड चुस्कीआज का इतिहासः देश-दुनिया में 30 मार्च की तारीख, महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा?

ज़रा हटकेबेइज्जती करके इज्जत देने पर विश्वविद्यालय का बहुत-बहुत शुक्रिया?, डिग्री प्राप्त करते समय पत्रकारिता छात्रा की तीखी टिप्पणी वायरल, देखिए

भारत अधिक खबरें

भारतगोदामों से सीधे एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध, सीएम रेखा गुप्ता ने कहा-भंडारण केंद्रों पर न जाएं और न ही भीड़ में इकट्ठा हों

भारतउच्च शिक्षा और अनुसंधान की चुनौतियां

भारतआदिवासी खेल: नई प्रतिभाओं की तलाश में एक सार्थक पहल

भारतबारामती विधानसभा उपचुनावः सीएम फडणवीस की बात नहीं मानी?, कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को चुनाव मैदान में उतारा

भारतUP की महिला ने रचा इतिहास! 14 दिनों में साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं