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मॉस्को में विदेश मंत्रियों की मुलाकात से पहले भारत-चीन सैनिकों के बीच पैंगोग में हुई थी 100-200 राउंड की फायरिंग

By विनीत कुमार | Updated: September 16, 2020 11:27 IST

भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव बरकरार है। इस बीच ये जानकारी सामने आई है कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच सितंबर की शुरुआत में 100 से 200 राउंड की फायरिंग हुई थी।

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ठळक मुद्देभारत और चीन के बीच सितंबर की शुरुआत में हुई थी करीब 200 राउंड की फायरिंगदोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मुलाकात के कुछ दिन पहले हुई थी ये घटना

भारत और चीन के सैनिकों ने इस साल सितंबर के शुरुआती हफ्ते में पैंगोग झील के उत्तरी किनारे में 'चेतावनी के तौर' पर 100 से 200 राउंड की फायरिंग की थी। सूत्रों के हवाले से ये जानकारी सामने आई है। ये घटना उस समय हुई जब भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों की अनदेखी कर एक पोस्ट बनाने की कोशिश में जुटे थे। भारत ने इस समय फिंगर 3-4 के आसपास की ऊंचाई पर अपना कब्जा रखा है।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार ये घटना विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी समकक्ष वांग यी की 10 सितंबर को हुई मुलाकात से कुछ दिन पहले हुई थी। दोनों नेताओं ने मॉस्कों में लद्दाख में एलएसी पर तनाव घटाने की कोशिश के तौर पर मुलाकात की थी।

दोनों ओर की ओर से इस मुलाकात के बाद लंबे समय से जारी गतिरोध समाप्त करने के लिए पांच सूत्रीय योजना पर सहमती भी जताई गई थी। इसमें सीमा के प्रबंधन से जुड़े सभी मौजूदा समझौतों एवं नियमों का पालन करना, शांति बनाए रखना और स्थिति को बिगाड़ सकने वाली हर कार्रवाई से बचना शामिल है। 

पिछले हफ्ते भी चीन ने की थी नापाक कोशिश

रिपोर्ट के अनुसार चीन ने पिछले हफ्ते भी लद्दाख में पैंगोग झील के दक्षिणी किनारे पर भारतीय कब्जे को हटाने की कोशिश की थी। साथ ही हवा में गोलियां भी चीनी सैनिकों की ओर से चलाई गई थी। चीनी सैनिकों ने गलवान घाटी में 14 जून को हुए झड़प की तरह बंदूक औग गोली छोड़ मध्यकालीन युद्ध जैसे हथियरों के इस्तेमाल की कोशिश की थी। 

इस दौरान दोनों ओर से बाद में गोलियां भी चलाई गईं। पिछले 45 सालों में ऐसा पहली बार हुआ जब भारत और चीन के सैनिकी ओर से एक-दूसरे के लिए फायरिंग की गई।

बता दें कि भारतीय सैनिकों ने हाल ही में इस क्षेत्र में ऊंचाइयों पर कब्जा करके सामरिक लाभ हासिल किया है। सूत्रों का कहना है कि इन ऊंचाइयों पर जाने के प्रयास में चीनी सेना द्वारा कई उकसावे के बाद भी भारतीय सेना मैदान में डटी हुई है।

पिछले सप्ताह के पैंगोंग झील क्षेत्र की उपग्रह से ली गई तस्वीरें दिखाती हैं कि उत्तरी किनारे पर चीनी निर्माण गतिविधि को जारी रखे हुए है और दक्षिण बैंक में भी एलएसी के पास नए निर्माण कर रहा है।

टॅग्स :लद्दाखचीनभारतीय सेनासुब्रह्मण्यम जयशंकर
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