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किसानों के प्रदर्शन का असर: दूसरे राज्यों से दिल्ली में सब्जियों, फलों की आपूर्ति हुई प्रभावित

By भाषा | Updated: November 30, 2020 20:46 IST

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नयी दिल्ली, 30 नवंबर पिछले पांच दिनों से सिंघू और टीकरी बॉर्डर के पास किसानों के प्रदर्शन के कारण दूसरे राज्यों से दिल्ली में सब्जियों और फलों की आपूर्ति पर असर पड़ा है और आजादपुर मंडी में भी इसकी आपूर्ति आधी रह गयी है ।

दिल्ली के दूसरे हिस्सों के विक्रेताओं ने भी कहा कि आपूर्ति सीमित होने के कारण मौसमी सब्जियों की कीमत 50 रुपये से 100 रुपये तक चली गयी है ।

उन्होंने बताया कि सिंघू और टीकरी बॉर्डर पर मार्ग बाधित होने के कारण पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर से सब्जियों और फलों की आपूर्ति पर असर पड़ा है।

आजादपुर में कृषि उत्पाद विपणन समिति के अध्यक्ष आदिल खान ने बताया कि दिल्ली की सबसे बड़ी थोक मंडी आजादपुर में सब्जियों और फलों की आपूर्ति घटकर आधी रह गयी है। खान ने कहा, ‘‘आम दिनों में आजादपुर मंडी में दूसरे राज्यों से सब्जियों और फलों के करीब 2500 ट्रक आते हैं। अब यह संख्या घटकर 1,000 रह गयी है। अगले कुछ दिनों तक बॉर्डर बंद रहने से स्थिति और खराब होगी।’’

हालांकि, उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों के कारण कीमतों में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई है और पहले से भंडारित उत्पाद बेचे जा रहे हैं।

इस बीच, कुछ विक्रेताओं ने कहा कि कम आपूर्ति के कारण मौसमी सब्जियों की थोक कीमत 50 से 100 रुपये तक चली गयी है। उन्होंने कहा कि सीमा पर अवरोध के कारण ट्रकों को दिल्ली तक पहुंचने में मुश्किलें हो रही है और कुछ ट्रक आ भी रहे हैं तो उन्हें काफी देरी हो रही है।

आजादपुर मंडी में हरे मटर के आढ़ती गोपाल ने कहा कि सर्दियों में पंजाब के अमृतसर-होशियारपुर क्षेत्र से मटर के 40-45 ट्रक आते हैं लेकिन अब 15-20 ट्रक ही आ रहे हैं ।

ओखला मंडी में थोक विक्रेता हकीम रहमान ने कहा, ‘‘दिल्ली में आलू और प्याज की मुख्य रूप से आपूर्ति महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश से होती है और किसानों के आंदोलन के कारण इन राज्यों के मार्ग प्रभावित नहीं हुए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर से सब्जियों और फलों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।’’

आजादपुर मंडी के थोक फल विक्रता आर के भाटिया ने कहा कि सेब जैसे फलों की आपूर्ति बाधित हुई है लेकिन कीमत कमोबेश समान है। इस बार कश्मीर में सेब की अच्छी पैदावार नहीं हुई, इसलिए कीमत पहले से ही ज्यादा है और मांग कम हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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