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आईआईएसईआर, यूएनएमसी ने कोविड-19 के मरीजों का इलाज करने के लिए एक दवाई की पहचान की

By भाषा | Updated: March 22, 2021 20:50 IST

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नयी दिल्ली, 22 मार्च भोपाल के भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) और अमेरिका के नेब्रास्का मेडिकल सेंटर (यूएनएमसी) के अनुसंधानकर्ताओं ने एक दवाई की पहचान की है, जिसका इस्तेमाल कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए किया जा सकता है।

टीम के मुताबिक, ‘रेपामाइसिन’ का इस्तेमाल फिलहाल कैंसर के रोगियों और अंग प्रतिरोपण कराने वाले मरीजों के उपचार के लिए किया जा रहा है। इसका रसायनिक पदार्थ भारत और विदेश में आम तौर पर उपलब्ध रहता है।

शोधपत्र प्रतिष्ठित ‘ इंटरनेशल एलसीवियर जर्नल, केमिको बायोलॉजिकल इंटरेक्शन’ में प्रकाशित हुआ है। शोध बताता है कि इस दवाई से कोविड-19 के मरीजों का इलाज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

भोपाल के आईआईएसईआर में ‘इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर फॉर एंन्ट्रप्रनर्शिप’ (आईआईसीई) के प्रधान वैज्ञानिक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमजद हुसैन ने कहा कि नई दवाई को विकसित करने में समय लगता है और तत्काल महामारी से लड़ने के लिए एक समाधान के तौर पर उसपर यकीन नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पहले से बनी दवाई को पुनरुद्देशित करना आकर्षित समाधान है, जिसमें मौजूदा दवा का इस्तेमाल संबंधित या गैर संबंधित बीमारी के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो कोविड-19 के खिलाफ जांची जा सकती है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा दवाई को पूर्व क्लिनिकल के चरण से गुजरना नहीं पड़ेगा और इसका इस्तेमाल दूसरे चरण के परीक्षण के तौर पर सीधे कोविड-19 मरीजों पर किया जा सकता है।

इसी तरह की एक मिसाल ‘रेमडेसिविर’ दवाई है जिसको विकसित तो ‘हेपिटाइटिस सी’ संक्रमण के उपचार के लिए किया गया था लेकिन इसने कोविड-19 मरीजों के इलाज में सीमित सफलता दवाई है।

महामारी को देखते हुए ऐसी अन्य दवाओं की पहचान जरूरी है और ‘रेपामाइसिन’ ‘रेमेडेसिविर’ से अलग तरह से काम करती है। ‘रेमेडिसिविर’ सीधे वायरस को निशाना बनाती है जबकि हुसैन के मुताबिक, ‘रेपामाइसिन’ उन प्रोटिनों को निशाना बनाती है जहां वायरस अपनी जड़े जमाता है और यह संक्रमण को रोक सकती है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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