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उच्च न्यायालय ने धनशोधन मामले में अवंता ग्रुप के प्रवर्तक गौतम थापर की अर्जी पर ईडी से मांगा जवाब

By भाषा | Updated: August 16, 2021 16:27 IST

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नयी दिल्ली, 16 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को 500 करोड़ रूपये के धनशोधन मामले में गिरफ्तार अवंता ग्रुप के प्रवर्तक गौतम थापर के इस दावे पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) स जवाब मांगा कि 24 घंटे की अनिवार्य सांविधिक सीमा के बीत जाने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया।

थापर ने निचली अदालत के पांच अगस्त के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है जिसमें उनकी गिरफ्तारी को अवैध करार देने की उनकी अर्जी बिना कोई कारण बताए खारिज कर दी गयी।

न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने ईडी को थापर की दो याचिकाओं पर सात दिन में हलफनामे के जरिए जवाब देने का निर्देश दिया और इस मामले की सुनवाई 27 अगस्त के लिए निर्धारित कर दी।

उच्च न्यायालय को सूचित किया गया कि थापर को आज दिन में बाद में निचली अदालत में पेश किया जाएगा। उन्हें दस दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेजा गया है।

थापर के वकील विजय अग्रवाल ने दलील दी कि गिरफ्तारी मेमो में (उनके मुवक्किल की) गिरफ्तारी का वक्त तीन अगस्त रात सात बजकर 55 मिनट दिखा गया है जबकि थापर के यहां तीन अग्स्त को सुबह साढे आठ बजे ही ईडी अधिकारियों ने तलाशी एवं जब्ती की थी तथा उसी वक्त उन्हें गिरफ्तार किया था।

अग्रवाल ने कहा कि थापर को चार अगस्त को विशेष पीएमएलए न्यायाधीश के सामने पेश किया गया जबकि कानून के प्रावधानों के अंतर्गत 24 घंटे के अंदर पेश करने की समयसीमा बीत चुकी थी और उसके बाद उन्हें पहले एक दिन के लिए और फिर पांच अगस्त को 10 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिय गया।

इसके अलावा, थापर ने ईडी द्वारा दर्ज प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट(ईसीआईआर) की प्रति, गिरफ्तारी के लिए बताये गये कारणों की प्रति भी मांगी है ताकि यह विश्वास हो सके कि वह धनशोधन अपराध के गुनहगार बताये गये हैं।

ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि वह याचिकाओं पर जवाब दाखिल करेंगे और इसमें जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं है।

एजेंसी ने अदालत से कहा था कि जांच में सामने आया है कि अपराध की करीब 500 करोड़ रूपये की राशि का ओस्ट बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड (ओबीपीएल), झबुआ पावर लिमिटेड (जेपीएल, झबुआ पावर इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (जेपीआईएल), अवंता पावर एड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एपीआईएल) , अवंता रीयल्टी लिमिटेड आदि के माध्यम से धनशोधन किया गया था और ये कंपनियों गौतम थापर के प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण एवं स्वामित्व में हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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