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17 को लॉन्च होगा देश का सबसे ताकतवर संचार उपग्रह जीसैट-30, ISRO के इस मिशन से बढ़ेगी इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क स्पीड

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 14, 2020 04:08 IST

इसरो का जीसैट-30 यूरोपियन हैवी रॉकेट एरियन-5 ईसीए से शुक्रवार 17 जनवरी को तड़के 2.35 बजे दक्षिण अमेरिका के उत्तरपूर्वी तट पर कौरो के एरियर प्रक्षेपण परिसर से छोड़ा जाएगा. जीसैट-30 का वजन 3357 किलो है. यह इनसैट-4ए की जगह लेगा और उसकी कवरेज क्षमता अधिक होगी.

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ठळक मुद्देभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) 17 जनवरी को देश का सबसे ताकतवर संचार उपग्रह लांच करेगा.इसकी मदद से देश में नई इंटरनेट टेक्नोलॉजी लाई जा सकेगी.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) 17 जनवरी को देश का सबसे ताकतवर संचार उपग्रह लांच करेगा. इस उपग्रह की लांचिंग से देश की संचार व्यवस्था और मजबूत हो जाएगी. इसकी मदद से देश में नई इंटरनेट टेक्नोलॉजी लाई जा सकेगी. देश के ऐसे क्षेत्र, जहां अब तक मोबाइल नेटवर्क नहीं है, वहां नेटवर्क को फैलाने में मदद मिलेगी.

इसरो का जीसैट-30 यूरोपियन हैवी रॉकेट एरियन-5 ईसीए से शुक्रवार 17 जनवरी को तड़के 2.35 बजे दक्षिण अमेरिका के उत्तरपूर्वी तट पर कौरो के एरियर प्रक्षेपण परिसर से छोड़ा जाएगा. जीसैट-30 का वजन 3357 किलो है. यह इनसैट-4ए की जगह लेगा और उसकी कवरेज क्षमता अधिक होगी.

क्या है जीसैट-30

जीसैट-30 जीसैट सीरीज का बेहद ताकतवर संचार उपग्रह है, जिसकी मदद से देश की संचार प्रणाली बेहतर होगी. अभी जीसैट सीरीज के 14 सैटेलाइट काम कर रहे हैं. इनकी बदौलत देश में संचार व्यवस्था कायम है. जीसैट-30 की मदद से देश की संचार प्रणाली, टेलीविजन प्रसारण, सैटेलाइट के जरिए समाचार प्रबंधन, समाज के लिए काम आने वाली जियोस्पेशियल सुविधाओं, मौसम संबंधी जानकारी और भविष्यवाणी, आपदाओं की पूर्व सूचना और खोजबीन और रेस्क्यू ऑपरेशन में इजाफा होगा.

क्यों पड़ी जरूरत?

पुराने संचार उपग्रहों की उम्र अब पूरी हो रही है. देश में इंटरनेट की नई टेक्नोलॉजी आ रही है. ऑप्टिकल फाइबर का जाल बिछाया जा रहा है. 5जी तकनीक पर काम चल रहा है. ऐसे में ज्यादा ताकतवर सैटेलाइट की जरूरत थी. जीसैट-30 इन जरूरतों को पूरा करेगा.

अधिकतम ट्रांसपांेडर लगाने के लिए तैयार इसरो ने कहा कि जीसैट -30 के संचार पेलोड को इस अंतरिक्ष यान में अधिकतम ट्रांसपोंडर लगाने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है. इसका व्यापक रूप से वीसैट नेटवर्क, टेलीपोर्ट सेवाएं, डिजिटल सैटेलाइट खबर संग्रहण (डीएसएनजी) आदि के लिए किया जाएगा.

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