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ऑक्सीजन संकट के चलते कम मरीजों को भर्ती करने पर विचार करे सरकार: सर गंगाराम अस्पताल

By भाषा | Updated: April 24, 2021 16:21 IST

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नयी दिल्ली, 24 अप्रैल सर गंगाराम अस्पताल की ओर से शनिवार को सरकार से अनुरोध किया गया कि दिल्ली में गहराते ऑक्सीजन संकट के बीच वह अस्पताल में भर्ती किए जाने वाले मरीजों की संख्या को घटाने पर विचार करे।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को सर गंगाराम अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण 25 गंभीर मरीजों की मौत हो गई थी।

गंगाराम अस्पताल के प्रमुख डॉ डी एस राणा ने कहा, ‘‘मैं केंद्र और राज्य सरकार दोनों से मदद की अपील करता हूं। एक ओर तो उन्होंने कोविड बेड की संख्या बढ़ा दी है और दूसरी ओर वे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं कर पा रहे। ऐसे में हम कैसे काम करेंगे?’’

उन्होंने कहा, ‘‘यदि यह कोविड सुनामी है और सरकार ने आपदा प्रबंधन कानून लागू किया है तो उन्हें इसी के मुताबिक काम करना चाहिए। हम चाहते हैं कि इसमें तुरंत हस्तक्षेप किया जाए।’’

डॉ. राणा ने कहा, ‘‘सरकार भरसक प्रयास कर रही है लेकिन शायद वह खुद भी लाचार है। लेकिन फिर यह बात उन्हें स्वीकार करनी चाहिए और भर्ती किए जाने वाले मरीजों की संख्या घटानी चाहिए।’’

बीते कुछ दिन से राष्ट्रीय राजधानी और आस पास के इलाकों के अस्पताल ऑक्सीजन की कमी के मद्देनजर सोशल मीडिया एवं अन्य मंचों पर मदद की गुहार लगा रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि एक और त्रासदी से बचने के लिए गंगाराम अस्पताल के अधिकारी संघर्ष कर रहे हैं। अस्पताल को प्रतिदिन कम से कम 11,000 घन मीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता है।

डॉ. राणा ने कहा, ‘‘मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। लोग अपने ऑक्सीजन सिलेंडर ला रहे हैं, यह देखकर हमें दुख होता है। अस्पताल ने सभी अधिकारियों और नोडल अधिकारियों से संपर्क साधा लेकिन कोई मदद नहीं आ रही। सैकड़ों कॉल किए गए लेकिन कोई फोन ही नहीं उठाता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें केवल 500 से 1500 घन मीटर की आपूर्ति मिल रही है। हमारे यहां 516 कोविड मरीज हैं जिनमें से 129 आईसीयू में हैं और 29 वेंटिलेटर पर हैं। आपूर्ति की कमी के कारण इन 29 मरीजों को मध्य रात्रि से हाथों के जरिए वेंटिलेशन दिया जा रहा है लेकिन यह लंबे समय तक नहीं किया जा सकता। कर्मी भी थक रहे हैं।’’

सुबह अस्पताल को डेढ़ टन ऑक्सीजन मिली थी। करीब दो बजे डॉ. राणा ने एक वक्तव्य जारी करके कहा, ‘‘अब इसमें से 0.7 टन ही बची है जो केवल एक घंटा ही चल पाएगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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