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सरकार ने भू-स्थानिक डाटा को नियंत्रित करने वाली नीतियों के उदारीकरण की घोषणा की

By भाषा | Updated: February 15, 2021 19:16 IST

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नयी दिल्ली, 15 फरवरी देश की मैपिंग नीति में व्यापक बदलाव करते हुए सरकार ने सोमवार को भू-स्थानिक आंकड़ों (डाटा) के अधिग्रहण और उत्पादन को नियंत्रित करने वाली नीतियों के उदारीकरण की घोषणा की। इस कदम से क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने और सार्वजनिक तथा निजी संस्थाओं के लिए समान अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी सचिव आशुतोष शर्मा ने कहा कि नए दिशानिर्देशों के तहत क्षेत्र को नियंत्रण मुक्त कर दिया जाएगा और मंजूरी हासिल करने जैसे पहलुओं को दूर किया गया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्थाओं के लिए इसे पूरी तरह से नियंत्रण मुक्त किया जायेगा और भू-स्थानिक आंकड़े के अधिग्रहण और उत्पादन के लिए पहले से मंजूरी लेना, सुरक्षा मंजूरी, लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भू-स्थानिक डेटा के अधिग्रहण और उत्पादन को नियंत्रित करने वाली नीतियों को आसान बनाया जाएगा और यह सरकार के ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ के अभियान के लिए एक ‘‘बड़ा कदम’’ है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मानदंडों में ढील से कई क्षेत्रों में बहुत मदद मिलेगी, जो उच्च गुणवत्ता वाले नक्शों की अनुपलब्धता के कारण त्रस्त थे।

मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘हमारी सरकार ने एक ऐसा निर्णय लिया है, जो डिजिटल इंडिया को बड़ी गति प्रदान करेगा। भू-स्थानिक डेटा के अधिग्रहण और उत्पादन को नियंत्रित करने वाली नीतियों को आसान बनाया जाएगा। इससे हमारे आत्मनिर्भर भारत के विचार को भी बढ़ावा मिलेगा।’’

उन्होंने कहा कि इस कदम से देश के किसानों, स्टार्ट-अप, निजी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र और अनुसंधान संस्थानों को नवाचारों को चलाने और समाधानों को हासिल करने में मदद मिलेगी। इससे रोजगार भी पैदा होगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

मोदी ने कहा, ‘‘भारत के किसानों को भी भू-स्थानिक और सुदूर संवेदी आंकड़े का फायदा मिलेगा। आंकड़े से नई प्रौद्योगिकियों और मंचों का उदय हो सकेगा जो कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में दक्षता बढ़ाएंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ये सुधार भारत में व्यापार करना आसान बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं।’’

हर्षवर्धन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध भू-स्थानिक सेवाओं के आने के साथ बहुत से भू-स्थानिक डाटा जो कि प्रतिबंधित क्षेत्र में हुआ करते थे, अब आसानी से उपलब्ध हैं और ऐसी जानकारी को विनियमित करने के लिए उपयोग की जाने वाली कुछ नीतियां/दिशानिर्देश अप्रचलित और निरर्थक हो गये हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘विश्व स्तर पर आसानी से उपलब्ध होने वाली चीजों को विनियमित करने की आवश्यकता नहीं है।’’

गूगल मैप्स के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “अगर हमें अपनी सेवाएं उपलब्ध करानी हैं, तो हमें उदारीकरण करना होगा, डाटा एकत्र करना और उपयोग करना शुरू करना होगा।’’

अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस निर्णय से भारत की भू-मानचित्रण क्षमता का उपयोग सभी क्षेत्रों में देश के उच्च लक्ष्य के लिए किया जा सकेगा और सुरक्षा उद्देश्यों के लिए केवल इसकी भू-मानचित्रण क्षमता तक सीमित नहीं होगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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