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केजरीवाल सरकार और निगमों से HC ने कहा- सफाई कर्मियों को दिए जा रहे पीपीई किट का दें ब्योरा

By भाषा | Updated: June 2, 2020 06:10 IST

अदालत ने पीठ द्वारा उठाए गए बिंदुओं को रेखांकित करते हुए हलफनामा दाखिल करने के लिए दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगमों को एक हफ्ते का समय दिया। अदालत ने इस बारे में भी बताने को कहा है कि नगर निगमों ने प्रत्येक वार्ड में संक्रमण मुक्त करने वाले कक्ष लगाए हैं या नहीं।

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ठळक मुद्देदिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को आप सरकार और तीनों नगर निगमों को सफाई कर्मियों की संख्या और कोविड-19 महामारी के दौरान रोजाना आधार पर उन्हें मुहैया कराए गए पीपीई किट का ब्योरा देने को कहा।अदालत ने कहा कि हलफनामे में ये नहीं बताया गया है कि उनके क्षेत्र में कितने सफाई कर्मचारी हैं, उनमें से कितनों को रोजाना आधार पर मास्क, ग्लव्स और पीपीई किट मुहैया कराए गए।

नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को आप सरकार और तीनों नगर निगमों को अपने-अपने क्षेत्र के सफाई कर्मियों की संख्या और कोविड-19 महामारी के दौरान रोजाना आधार पर उन्हें मुहैया कराए गए पीपीई किट का ब्योरा देने को कहा। दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगमों की ओर से दाखिल हलफनामा और स्थिति रिपोर्ट को अधूरा पाए जाने पर न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने यह निर्देश जारी किया। 

अदालत ने कहा कि हलफनामे में ये नहीं बताया गया है कि उनके क्षेत्र में कितने सफाई कर्मचारी हैं, उनमें से कितनों को रोजाना आधार पर मास्क, ग्लव्स और पीपीई किट मुहैया कराए गए। पीठ ने कहा कि हलफनामे में यह भी नहीं बताया गया कि संबंधित निगमों के अधिकार क्षेत्र में कितने निरुद्ध क्षेत्र हैं ताकि अदालत को पता चले कि क्या उन क्षेत्रों में सफाई कर्मियों की जरूरतें पूरी हो रही है या नहीं। 

अदालत ने पीठ द्वारा उठाए गए बिंदुओं को रेखांकित करते हुए हलफनामा दाखिल करने के लिए दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगमों को एक हफ्ते का समय दिया। अदालत ने इस बारे में भी बताने को कहा है कि नगर निगमों ने प्रत्येक वार्ड में संक्रमण मुक्त करने वाले कक्ष लगाए हैं या नहीं। अगर नहीं लगाए गए हैं तो हर दिन ड्यूटी पूरी करने के बाद सफाई कर्मचारियों को संक्रमणरहित बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। 

पीठ ने कहा कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट के निपटान के मुद्दे पर भी ध्यान देने की जरूरत है। यह भी गंभीर विषय है क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि ऐसे अपशिष्ट को कचरा फेंकने वाले सामान्य स्थल पर ही फेंका जा रहा है जो कि संक्रमण को फैलाने का स्थान बन सकता है। 

अदालत ने इन सब निर्देशों के साथ मामले को नौ जून को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। सामाजिक कार्यकर्ता हरनाम सिंह और अखिल भारतीय नगर निगम कर्मचारी संघ की याचिकाओं पर यह आदेश आया। अदालत से कोरोना वायरस महामारी के समय काम करने वाले सफाई कर्मचारियों को निजी सुरक्षा उपकरण मुहैया कराने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। 

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