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'समय पर शादी करें और जब तक जनसंख्या नियंत्रण कानून न आ जाए 5-6 बच्चे पैदा करे हर सनातनी' - बोले कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर

By शिवेंद्र राय | Updated: February 20, 2023 10:30 IST

वृंदावन में ठाकुर प्रियाकान्त जी मंदिर के संस्थापक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जब तक जनसंख्या नियंत्रण कानून न आ जाए, तब तक हर सनातनी को ज्यादा से ज्यादा संतानें पैदा करनी चाहिए। इसके लिए समय पर शादी करें और पांच-छह बच्चे पैदा करें।

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ठळक मुद्देअनुमान के मुताबिक 2021 में भारत की जनसंख्या 140.76 करोड़ थी2011 में हुए जनगणना के आंकड़ों के अनुसार यह संख्या 121 करोड़ थीभारत की कुल आबादी में 79.8% हिंदू और 14.2% मुस्लिम हैं

नागपुर: लगातार बढ़ती जनसंख्या और घट रहे संसाधनों के बीच जहां एक तरफ जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग हो रही है वहीं दूसरी तरफ कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील कर रहे हैं। भागवत कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज नागपुर के एक कार्यक्रम में दिए गए बयान के कारण चर्चा में हैं।

देवकीनंदन ठाकुर इस कार्यक्रम में कहा, "जब तक जनसंख्या नियंत्रण कानून न आ जाए, हर सनातनी को पांच से छह बच्चे पैदा करने चाहिए। जनसंख्या पर आज तक नियंत्रण नहीं हो पाया है। कोई सोच भी नहीं सकता है कि कितना बड़ा जनसंख्या विस्फोट हुआ है। 4 बीबी और 40 बच्चे जैसे मामलों पर कोई बोलने वाला नहीं है।"

वृंदावन में ठाकुर प्रियाकान्त जी मंदिर के संस्थापक देवकीनंदन ठाकुर ने आगे कहा, "मेरा कहना है कि जब तक जनसंख्या नियंत्रण कानून न आ जाए, तब तक हर सनातनी को ज्यादा से ज्यादा संतानें पैदा करनी चाहिए।  इसके लिए समय पर शादी करें और पांच-छह बच्चे पैदा करें।"

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने इस दौरान सनातन बोर्ड के गठन की मांग भी की है और कहा कि भारत तब तक ही धर्मनिरपेक्ष देश है जब तक सनातन को मानने वाले बहुसंख्यक हैं। 

बता दें कि अनुमान के मुताबिक 2021 में भारत की जनसंख्या 140.76 करोड़ थी। वहीं 2011 में हुए जनगणना के आंकड़ों के अनुसार यह संख्या 121 करोड़ थी। 2011 के आंकड़ों के अनुसार देश में 96.63 करोड़ हिंदू और 17.22 करोड़ मुस्लिम हैं। भारत की कुल आबादी में 79.8% हिंदू और 14.2% मुस्लिम हैं। इनके बाद ईसाई 2.78 करोड़ (2.3%) और सिख 2.08 करोड़ (1.7%) हैं। बौद्ध और जैन धर्म को मानने वालों की आबादी 1% से भी कम है।

2001 की तुलना में 2011 में भारत की आबादी 17.7% तक बढ़ गई थी। इस दौरान मुसलमानों की आबादी सबसे ज्यादा करीब 25% तक बढ़ी थी जबकि हिंदू 17% से कम बढ़े थे। बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग भी हो रही है। 

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