पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान सोमवार को बिहार के प्रसिद्ध पारंपरिक खाद्य उत्पादों को लेकर भी सदन में दिलचस्प बहस देखने को मिली। उत्साहित, विपक्षी विधायक भाई चंद्रशेखर ने मनेर के प्रसिद्ध लड्डू को भी GI टैग दिलाने की मांग उठाई। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि बड़हिया का रसगुल्ला और बाढ़ की लाई तो मंत्री खाते हैं, लेकिन इनके GI टैग के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं करते। इसपर उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि बाढ़ की प्रसिद्ध खूबी की लाई को GI टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार पहले भी कई उत्पादों को GI टैग दिलाया गया है और अन्य उत्पादों पर भी काम जारी है। इसी क्रम में विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने जानकारी दी कि गया के प्रसिद्ध तिलकुट को भी GI टैग के लिए आवेदन किया गया है। इस पर मंत्री ने भी हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया। हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया कि बिहार के सभी प्रमुख पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की दिशा में पहल की जाएगी।
साथ ही विधानसभा परिसर में आयोजित बसंत उत्सव में राज्य के प्रसिद्ध खाद्य उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने का सुझाव भी सामने आया। वहीं, विधानसभा में मक्का आधारित उद्योग और एथेनॉल उत्पादन को लेकर अहम चर्चा हुई। कोमल सिंह ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि बिहार में मक्का और चावल की भरपूर उपलब्धता के बावजूद एथेनॉल उत्पादन के लिए चावल पंजाब से लाया जा रहा है, जबकि राज्य के किसानों को इसका लाभ मिलना चाहिए।
उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने जवाब देते हुए बताया कि मुजफ्फरपुर जिले में मक्का आधारित औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के तहत 30 संयंत्र संचालित हैं, जिनमें 714 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इसके अलावा मक्का क्षेत्र में 58 नए निवेश संवर्धन को मंजूरी दी गई है, जिनमें 2958 करोड़ रुपये के संयंत्र लगाने की योजना है।
मंत्री ने कहा कि बिहार में 11 डेडिकेटेड एथेनॉल प्लांट संचालित हैं और केंद्र सरकार ने 46 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीद का दावा दिया है। उन्होंने सदन में स्पष्ट किया कि राज्य में एक भी एथेनॉल प्लांट बंद नहीं होगा। सरकार ने उद्योग और किसानों के हित में ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया।