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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020: दिल्ली में चुनाव जीतने के लिए बीजेपी करेगी महापंचायत, सीएए पर भी चर्चा

By एएनआई | Updated: January 3, 2020 16:23 IST

राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय जनता पार्टी ने अपने वोट बैंक तैयार करने के लिए मुहिम तेज कर दी है। पार्टी राजधानी के ग्रामीण इलाकों से वोट इकट्ठा करने के लिए महापंचायत का आयोजन करेगी।

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ठळक मुद्देबीजेपी ने अपने वोट बैंक तैयार करने के लिए मुहिम तेज कर दी है। पार्टी  के नेताओं का मानना है कि इस महापंचायत से भाजपा को उन वोटों को जीता जा सकता है। राजधानी के 74 गांवों में महापंचायत का आयोजन करने का फैसाला लिया है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने अपने वोट बैंक तैयार करने के लिए मुहिम तेज कर दी है। पार्टी ग्रामीण इलाकों से वोट इकट्ठा करने के लिए महापंचायत का आयोजन करेगी। 

इस साल दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने है। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने राजधानी के 74 गांवों में महापंचायत का आयोजन करने का फैसला लिया है। पार्टी के इस कदम को ग्रमीण इलाकों से वोट समेटने का माना जा रहा है। साथ ही भाजपा इस आयोजन में अपनी पार्टी का लक्ष्य भी बताएगी। 

इस विधानसभा चुनाव में ग्रामीण इलाकों के वोटों से 3 से 4 फीसदी मतों के हेरफेर से चुनाव का समीकरण बदल सकता है। इसलिए इस चुनाव में ग्रामीण इलाकों के वोटों को ज्यादा अहमियत दी जा रही है। साथ ही भाजपा की इसे लेकर चिंताए भी बढ़ गई हैं।

पार्टी नेताओं का मानना है कि इस महापंचायत से भाजपा इन वोटों को अपनी ओर कर सकती है। दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों को वोट के लिहाज ज्यादा मजबूत समझा जा रहा है, क्योंकि इससे विधानसभा की 70 सीटों  पर प्रभाव पड़ सकता है। 

हालांकि महापंचायत में गुर्जर समुदाय और जाट समुदाय के लोगों की आने की संभावना है। दक्षिणी और पूर्वी दिल्ली में गुर्जर समुदाय का ज्यादा प्रभुत्व है, जबकि पश्चिमी और उत्तरी दिल्ली में जाट समुदाय के लोगों का वर्चस्व है। 

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दक्षिणी दिल्ली से सांसद रमेश बिधूड़ी ने बताया कि महापंचायत के आयोजन में नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के बारे में लोगों का बताया जाएगा और उनके संदेह को दूर किया जाएगा। जिसके बारे में कांग्रेस पार्टी ने लोगों के बीच में भ्रांतियां फैला रखी है। 

बिधूड़ी ने आगे बताया,  "ऐसी बहुत सी सीटे हैं, जिन्हें ग्रामीण कहा जा सकता है और जिसमें से कुछ सीटें परंपरागत तौर पर भाजपा की हैं। यह पार्टी की तरफ से एक कोशिश है जिसके जरिए ग्रामीण इलाकों के बुजुर्ग और प्रभावशाली व्यक्तियों से बातचीत की जा सके।"

इन इलाकों के अधिकतर निवासी किराए से आने वाली आमदनी पर ही निर्भर है।  माना जा रहा है कि इस फैसले से इनके रोजगार पर अधिक प्रभाव पड़ेगा। इससे पहले राजधानी के व्यापरियों के लिए कमेटी का आयोजन किया गया था। जिसमें कैबिनेट मंत्री पीयूष गोयल ने लोगों को संबोधित किया था। पार्टी ने आशा जाताई है कि लोगों के मुद्दों पर क्रमानुसार बाचचीत करने से अधिक संख्या में लोगों तक अपनी पहुंच हासिल की जा सकती है।

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