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कोरोना से लड़ने के लिए आगे आई CRPF, मदद के लिए अपने शिविर और जवानों को देने की पेशकश

By भाषा | Updated: March 30, 2020 21:55 IST

सीआरपीएफ परिवहन, संसाधनों से जुड़ी सहायता के साथ ही अपने परिसरों में उपलब्ध जगहों का इस्तेमाल दवाओं और उपकरणों के भंडारण, आवश्यक वस्तुओं, भोजन, दवाओं के वितरण के लिये अपने कर्मियों की तैनाती करके भी मदद दे सकता है।

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कोरोना वायरस के फैलने के मद्देनजर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने आवश्यक वस्तुओं के भंडारण में स्थानीय प्रशासन की मदद के लिये देशभर में अपने शिविरों को खोल दिया है और राहत कार्य में सहायता के लिये अपने कर्मियों की सेवा देने की पेशकश की है।

सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल ने अपनी क्षेत्रीय इकाइयों से यह भी कहा है कि वे अपने पास के किसी गांव और मुहल्लों को “गोद” ले लें जिससे लॉकडाउन की इस अवधि के दौरान स्थानीय लोगों की राशन, दवाओं और मास्क जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

बल के मुख्यालय द्वारा जारी एक निर्देश में कहा गया, “देश में बनी मौजूदा आकस्मिक स्थिति के मद्देनजर, वरिष्ठ कमांडरों से परामर्श के बाद हमारे महानिदेशक (डीजी) द्वारा यह इच्छा व्यक्त की गई है कि कोविड-19 के खतरे से लड़ने के लिये सीआरपीएफ को हर संभव तरीके से राज्य प्रशासन की मदद करनी चाहिए।”

पीटीआई-भाषा के पास उपलब्ध इस दिशानिर्देश के मुताबिक, “हमारी अखिल भारतीय मौजूदगी को देखते हुए यह वांछनीय है कि हम अपने संसाधनों की पेशकश अपनी तैनाती वाले इलाकों में संबंधित राज्य प्रशासन को करें जिससे उन्हें इस बीमारी से निपटने के लिये और मजबूती मिले।”

इसमें कहा गया है कि सीआरपीएफ परिवहन, संसाधनों से जुड़ी सहायता के साथ ही अपने परिसरों में उपलब्ध जगहों का इस्तेमाल दवाओं और उपकरणों के भंडारण, आवश्यक वस्तुओं, भोजन, दवाओं के वितरण के लिये अपने कर्मियों की तैनाती करके भी मदद दे सकता है। इसमें कहा गया है कि सीआरपीएफ अपने परिसरों में विशेषज्ञों के दल को ठहरने की जगह देकर भी मदद कर सकता है।

बल ने अपने कमांडरों से पानी के टैंकर उपलब्ध कराने, जागरुकता फैलाने, भोजन पकाने और जरूरतमंदों एवं गरीबों के बीच इसके वितरण के संदर्भ में भी विचार करने को कहा है। बल के लिये दिशानिर्देश में यह भी कहा गया है कि वह बंद को प्रभावी तरीके से लागू कराने में स्थानीय प्रशासन को मदद दे सकते हैं तथा अपने घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के खाने और आराम के लिये तंबू भी लगा सकते हैं।

इसमें कहा गया, “इस पर भी विचार किया जा सकता है कि क्या हम अपनी तैनाती के आस-पास के इलाके में कुछ गांवों या मोहल्लों को गोद लेकर वहां अपने संसाधनों के जरिये राज्य प्रशासन की सहायता के लिये आवश्यक वस्तुओं के साथ ही मास्क, सैनेटाइजर और सफाई से जुड़े दूसरे सामान उपलब्ध करा सकते हैं। ” निर्देश में यह भी कहा गया है कि इन कामों के लिये तैनात सीआरपीएफ कर्मियों के स्वास्थ्य और साफ-सफाई से किसी तरह का समझौता न हो इस बात को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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