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कोरोना इम्पैक्ट: सांसदों के वेतन कटौती के बाद सूचना व सतर्कता आयोग में भी 30 फीसदी वेतन कटौती, नौकरशाह से लेकर न्यायाधीश सब पर लागू!

By हरीश गुप्ता | Updated: April 14, 2020 07:06 IST

भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 905 नए मामले सामने आए जबकि 51 लोगों की मौत हो गई। संक्रमितों की कुल संख्या 9,352 तक पहुंच गई और मृतकों की संख्या 324 हो गई।

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ठळक मुद्देसरकार ने यह कदम आर्थिक ढांचे पर बढ़ रहे दबाव के मद्देनजर उठाया है. सरकार चाहती है कि बड़े पदों पर मौजूद लोग स्वेच्छा से इस अभियान में शामिल हों.

नई दिल्ली: प्रशासनिक और अन्य खर्चों में कटौती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने सभी आयोगों, बोर्ड व वैधानिक निकायों के सभी वरिष्ठ सदस्यों के वेतन में 30 प्रतिशत कटौती का फैसला लिया है. राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपालों, मंत्रियों सहित सभी सांसदों और कई राज्यों के विधायकों पर कोविड-19 से उपजी परिस्थितियों में यह फैसला लागू हो चुका है. देशभर में इस वक्त केंद्र सरकार के तहत तकरीबन 200 बोर्ड, आयोग, ट्रिब्यूनल्स कार्यरत हैं.

जानें वेतन में कटौती का फैसला सरकार ने क्यों लिया? 

सरकार ने यह कदम आर्थिक ढांचे पर बढ़ रहे दबाव के मद्देनजर उठाया है. सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक एक वर्ष की इस प्रस्तावित कटौती के दायरे में सूचना और सतर्कता आयोग जैसे महत्वपूर्ण संस्थान भी होंगे. अधिकांश बोर्ड्स व निकायों में सेवानिवृत्त नौकरशाह, सेवानिवृत्त न्यायाधीश, विशेषज्ञ और अन्य शामिल हैं. यह कटौती इन सभी पर लागू होगी.

हालांकि इस संदर्भ में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय इस बड़े काम को अंजाम देने के लिए समन्वयन में लगा हुआ है. सरकार चाहती है कि बड़े पदों पर मौजूद लोग स्वेच्छा से इस अभियान में शामिल हों. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व केंद्रीय मंत्रियों के वेतन में कटौती की घोषणा के वक्त भी केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि यह कटौती स्वैच्छिक है. केंद्र सरकार के कामकाज का दायरा देखते हुए इसे लागू करना आसान नहीं होगा.

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