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आतंकी हमलों, मौतों से चर्चा में, फिर भी आकर्षण कभी कम नहीं हुआ अमरनाथ यात्रा का

By सुरेश डुग्गर | Updated: May 22, 2019 18:45 IST

1993 के प्रथम आतंकी प्रतिबंध ने लोगों को इसकी ओर आकर्षित होने पर मजबूर कर दिया। नतीजा वर्ष 1993 से वर्ष 2002 की यात्रा में औसत भाग लेने वालों का आंकड़ा दो लाख का रहा है।

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ठळक मुद्देसुरक्षा एजेंसियां इसकी पुष्टि करती हैं कि उस पार से अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। 1993 से लेकर 2002 तक के अरसे के दौरान होने वाले हमलों में कुल 72 अमरनाथ श्रद्धालु विभिन्न हमलों में मारे गए।

हमेशा चर्चा का विषय बनने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा के शुरू होने से कुछ दिन पहले उस पार से मिलने वाले उन संदेशों ने यात्रा के प्रति चिंता पैदा कर दी है जिनमें कहा जा रहा है कि आतंकियों के साथ-साथ पत्थरबाज यात्रा को निशाना बनाने की तैयारी में हैं।

कम नहीं हुआ आकर्षण 

यह चिंता इसमें शामिल होने वालों की सुरक्षा के प्रति है। हालांकि चिंता का सबसे बड़ा कारण यह है कि आतंकियों की मौतों के बाद कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के तेज होने की चेतावनी मिल रही थीं। पर इतना जरूर है कि आतंकी हमलों और मौतों से चर्चा में रहने वाली अमरनाथ यात्रा के प्रति आकर्षण आज भी बरकरार है।

आतंकी घुसपैठ 

सुरक्षा एजेंसियां इसकी पुष्टि करती हैं कि उस पार से अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। जिन 30 से 40 आतंकियों के इस ओर घुस आने की पुष्टि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा भी की जा रही है उनके प्रति गुप्तचर एजंसियां दावा करती हैं कि उन्हें अमरनाथ यात्रा पर हमले का टास्क मिला है।

पर बावजूद इसके यात्रा में शामिल होने की तमन्ना रखने वालों को ये संदेश डरा नहीं पा रहे हैं। पंजीकरण की लगातार बढ़ती भीड़ इसकी पुष्टि करती है। इतना जरूर है कि वर्ष 1993 की अमरनाथ यात्रा उन लोगों को अभी भी याद है जिन्होंने पहली बार इस यात्रा पर लगे प्रतिबंध के बाद ‘हरकतुल अंसार’ के हमलों को सहन किया था।

तब तीन श्रद्धालुओं की जानें गईं थी। पहले हमले के 10सालों बाद हुए भीषण हमले में 11 श्रद्धालु मौत की आगोश में चले गए थे। इन दस सालों में कोई भी साल ऐसा नहीं बीता था जब आतंकी हमलों और मौतों ने अमरनाथ यात्रा को चर्चा में न लाया हो लेकिन बावजूद इसके यह आज भी आकर्षण का ही केंद्र बनी हुई है।

आतंकी हमलों के साये में यात्रा 

फिर से इसे सुरक्षित और असुरक्षित बनाने की कवायद तेज हुई है। राज्य सरकार के लिए यह किसी चुनौती से कम इसलिए नहीं है क्योंकि वर्ष 1993 के बाद के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि शायद ही कोई साल ऐसा होगा जब आतंकी हमलों में श्रद्धालुओं की मौतें न हुई हों। और जो वर्ष बचा वह प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ गया। अर्थात अगर आतंकवादियों के हाथों से बच गए तो कुदरत के हाथों से नहीं बच पाए।

1993 के प्रथम आतंकी प्रतिबंध ने लोगों को इसकी ओर आकर्षित होने पर मजबूर कर दिया। नतीजा वर्ष 1993 से वर्ष 2002 की यात्रा में औसत भाग लेने वालों का आंकड़ा दो लाख का रहा है। इनमें सुरक्षाकर्मियों तथा स्थानीय लोगों की गिनती नहीं की जाती है।

आतंकी हमला और अमरनाथ यात्रा 

अमरनाथ यात्रा का एक रोचक तथ्य यह रहा कि यह आतंकी हमलों के कारण ही आकर्षण का केंद्र बनी थी मगर आतंकी हमलों में मरने वालों की संख्या इतनी नहीं थी जितने प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए। सरकारी रिकार्ड के मुताबिक, 1993 से लेकर 2002 तक के अरसे के दौरान होने वाले हमलों में कुल 72 अमरनाथ श्रद्धालु विभिन्न हमलों में मारे गए।

यह बात अलग है कि दिल की धड़कन रूकने या फिर घोड़े से फिसल कर मरने वालों की संख्या भी इन्हीं प्रति वर्ष उतनी ही रही थी जितनी आतंकी हमलों में मरने वालों की थी।

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