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प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर हमला किया, कहा-गावों में मर रहे हैं लोग, महामारी से निपटने की लचर व्यवस्था

By शीलेष शर्मा | Updated: June 6, 2021 20:31 IST

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आंकड़े देते हुए कहा कि देश भर में ऑक्सीजन बेड की संख्या 36 फीसदी कम हुई, आईसीयू बेड की संख्या 46 फीसदी और वेंटीलेटर बेड की संख्या  28 फीसदी कम हो गयी। 

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ठळक मुद्देसरकार को चेताया था की दूसरी लहर में अतिरिक्त बेड्स की ज़रूरत होगी। राहुल गांधी भी कोरोना और वैक्सीन को लेकर लगातार सरकार पर हमलावर हैं। सवाल उस समय उठ रहा है जब कोरोना महामारी शहरों से निकल कर गांव की ओर पलायन कर चुकी है।

नई दिल्लीः कोरोना की दूसरी लहर को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर अपना हमला जारी रखते हुए आज सीधा आरोप लगाया कि सितम्बर 2020 से लेकर जनवरी 2021 तक मोदी सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए संसाधन जुटाने की जगह उनमें भारी कमी कर दी।

प्रियंका ने आंकड़े देते हुए कहा कि देश भर में ऑक्सीजन बेड की संख्या 36 फीसदी कम हुई, आईसीयू बेड की संख्या 46 फीसदी और वेंटीलेटर बेड की संख्या  28 फीसदी कम हो गयी। प्रियंका ने हैरानी जताते हुए कहा कि यह कमी उस समय की गयी जब देश का प्रत्येक विशेषज्ञ, संसद की स्वस्थ सम्बन्धी स्थायी समिति और सरकार एक अपने स्रोतों ने सरकार को चेताया था की दूसरी लहर में अतिरिक्त बेड्स की ज़रूरत होगी। 

उन्होंने सवाल किया कि  ऐसा क्यों किया गया और इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है। उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी भी कोरोना और वैक्सीन को लेकर लगातार सरकार पर हमलावर हैं। उनकी दलील है कि वैक्सीन की खरीद केंद्र करें और वितरण राज्य सरकारें लेकिन मोदी सरकार ऐसा नहीं कर रही है।

यह सवाल उस समय उठ रहा है जब कोरोना महामारी शहरों से निकल कर गांव की ओर पलायन कर चुकी है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अब तक कोरोना से हुई मौतों में 52 फीसदी मौतें गांव में हुई हैं, यदि उत्तर प्रदेश की बात करें तो राज्य के अधिकाँश ज़िलों में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इसके लिए ज़िम्मेदार माने जा रहे हैं क्योंकि इन स्वास्थ्य केंद्र भवनों की हालत बूचड़खानों में तब्दील हो चुकी है , न वहां डाक्टर हैं, न मेडिकल स्टाफ, न दवाएं और न ही कोई सुविधा। टेस्टिंग का भी इन केंद्रों पर कोई प्रबंध नहीं है।

सरकार की लापरवाही का नमूना भाजपा के संस्थापकों में से एक रज्जू भइया के बुलंदशहर ज़िले के पैतृक गांव से लगाया जा सकता है, जहाँ उनके कुटुंब के ही एक सदस्य का स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में कोरोना से मौत हो गयी। मेरठ से लेकर मुख्यमंत्री के गृहनगर गोरखपुर तक हर गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का कमोवेश ये ही हाल है।     

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