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कांग्रेस-JDS को कर्नाटक संकट हल होने की उम्मीद, सिद्धारमैया और कुमारस्वामी इस्तीफा देने वाले विधायकों को मनाने मे जुटे

By भाषा | Updated: July 4, 2019 05:49 IST

कुमारस्वामी अभी अमेरिका में हैं। सूत्रों ने बताया कि दोनों नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से असंतुष्ट विधायकों से संपर्क किया और उन्हें मनाने की कोशिशें की। साथ ही, दोनों विधायकों को अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए उन्हें मनाने की कोशिशें की जा रही हैं।

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ठळक मुद्देकर्नाटक में कांग्रेस के दो विधायकों के इस्तीफे के बाद बचाव की मुद्रा में आए सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने बुधवार को भी उन्हें मनाने की कोशिशें जारी रखी।सोमवार को विजयनगर विधायक आनंद सिंह और गोकक विधायक रमेश जरकीहोली के इस्तीफे की घोषणा से 13 माह पुरानी एच डी कुमारस्वामी नीत कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन सरकार को दोहरा झटका लगा था।

कर्नाटक में कांग्रेस के दो विधायकों के इस्तीफे के बाद बचाव की मुद्रा में आए सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने बुधवार को भी उन्हें मनाने की कोशिशें जारी रखी और इस संकट का हल कर लेने के प्रति आशावादी दिखें। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल कांग्रेस और जद(एस) सूत्रों ने बताया कि और अधिक असंतुष्ट विधायकों के भाजपा से हाथ मिलाने की आशंका के मद्देनजर गठबंधन समन्वय समिति प्रमुख सिद्धारमैया और मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने स्थिति को काबू में करने के लिए उनसे संपर्क साधा।

कुमारस्वामी अभी अमेरिका में हैं। सूत्रों ने बताया कि दोनों नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से असंतुष्ट विधायकों से संपर्क किया और उन्हें मनाने की कोशिशें की। साथ ही, दोनों विधायकों को अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए उन्हें मनाने की कोशिशें की जा रही हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने अभी तक ये इस्तीफे स्वीकार नहीं किए हैं। सोमवार को विजयनगर विधायक आनंद सिंह और गोकक विधायक रमेश जरकीहोली के इस्तीफे की घोषणा से 13 माह पुरानी एच डी कुमारस्वामी नीत कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन सरकार को दोहरा झटका लगा था।

हालांकि, कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने कहा कि सिर्फ सिंह ने ही इस्तीफा दिया है और जरकीहोली का इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष तक नहीं पहुंचा है। जरकीहोली ने कहा था कि उन्होंने अपना इस्तीफा फैक्स से भेजा है और वह स्पीकर से जल्द ही मिलेंगे लेकिन बुधवार तक वह नहीं गए।

सिद्धारमैया ने भरोसा जताया कि सिंह अपना इस्तीफा वापस ले सकते हैं। सिद्धरमैया ने मैसूर में कहा, ‘‘सिर्फ आनंद सिंह ने ही (इस्तीफा) दिया है, हम उनसे बात कर रहे हैं। वह इसे वापस ले सकते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने (सिंह ने) इसके पीछे जेएसडब्ल्यू स्टील और भूमि मुद्दा जैसे कारण बताए हैं लेकिन ये सब (इस्तीफे के लिए) कारण नहीं हो सकते।...हम उन्हें मनाएंगे।’’

हालांकि, सिंह ने कहा कि पुनर्विचार के लिए सभी रास्ते खुले रखे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी मांगों के लिए सरकार के जवाब का इंतजार करेंगे। दरअसल, उनसे पूछा गया था कि क्या वह अपना इस्तीफा वापस लेंगे। स्पीकर रमेश कुमार ने भी कहा है कि एक विधायक ने उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा है और वह नियमों के अनुसार इस पर कार्य करेंगे, जबकि दूसरे विधायक के इस्तीफे से वह वाकिफ नहीं हैं।

सिंह द्वारा अपने इस्तीफे की एक प्रति राज्यपाल वजुभाई आर वाला को सौंपे जाने के बारे में अपनी नाराजगी का संकेत देते हुए स्पीकर ने कहा कि किसी विधायक को इस बात की समझ होनी चाहिए कि यह काम किस तरह से किया जाए और इसका निपटारा करने की जिम्मेदारी किसकी है। स्पीकर ने फैक्स के जरिए इस्तीफे भेजे जाने पर भी मंगलवार को सख्त ऐतराज जताया था।

इस बीच, राज्य में कांग्रेस के संकटमोचक एवं मंत्री डी. के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार सुरक्षित है और मुख्यमंत्री विधायकों से नौ और 10 जुलाई को जिलावार बैठकें करेंगे तथा उनके मुद्दे सुनेंगे। सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित बैठकों का लक्ष्य चिंताओं को दूर करना और असंतुष्ट विधायकों को मनाना है। उन्होंने बताया कि मंत्री पद पाने के आकांक्षी विधायकों को साल के आखिर में होने वाले मंत्रिमंडल में फेरबदल का इंतजार करने को कहा जाएगा।

वहीं,विधायकों के इस्तीफे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए जद(एस) प्रमुख एचडी देवगौड़ा ने कहा कि हालात का हल निकालने के लिए कांग्रेस में सक्षम नेता हैं और चिंता करने की कोई बात नहीं है। सिद्धारमैया ने संवाददाताओं से बात करते हुए अपना यह आरोप दोहराया कि भाजपा राज्य में कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन सरकार को अपदस्थ करने की साजिश रच रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी इसमें शामिल हैं।

उन्होंने भाजपा के ‘ऑपरेशन लोटस’ की तर्ज पर भगवा पार्टी के विधायकों को कांग्रेस द्वारा अपने पाले में करने की कोई कोशिश किए जाने की बात से इनकार किया। गौरतलब है कि 2008 में ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत भाजपा ने विधानसभा में अपना संख्या बल बढ़ाने के लिए विपक्षी विधायकों को इस्तीफा दिलाने और उन्हें भगवा पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ाने की रणनीति अपनाई थी। 

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