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वाराणसी में बोले पीएम मोदी- कृषि सुधार कानूनों पर भ्रम फैलाया जा रहा है, विपक्ष खेल चल रहा है...

By भाषा | Updated: November 30, 2020 16:13 IST

एक राज्य जो किसान की बातें कर रहे हैं उन्होंने किसान सम्मान निधि को अपने राज्य में लागू ही नहीं होने दिया। कहीं मोदी की जय-जयकार न हो जाए।

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ठळक मुद्देसरकार के फैसले पर भ्रम फैलाया जा रहा है।बीते कुछ समय से हमें नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है।

वाराणसीः  कृषि सुधार कानूनों को लेकर देश में जगह-जगह किसानों के आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मामले पर विपक्षी दलों पर करारा हमला करते हुए सोमवार को कहा कि पिछले कुछ समय से एक अलग ही 'ट्रेंड' देखने को मिल रहा है जिसके तहत सरकार के फैसले पर भ्रम फैलाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के खजूरी गांव में छह लेन मार्ग चौड़ीकरण के लोकार्पण अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा, ‘‘सरकारें जब नीतियां बनाती हैं, तो उन्हें समर्थन भी मिलता है, तो कुछ सवाल भी स्वाभाविक है। यह लोकतंत्र का हिस्सा है और भारत में यह जीवन परंपरा रही है, लेकिन पिछले कुछ समय से एक अलग ही ट्रेंड देश में देखने को मिल रहा है। पहले सरकार का कोई फैसला अगर किसी को पसंद नहीं आता था तो उसका विरोध होता था लेकिन बीते कुछ समय से हमें नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है अब विरोध का आधार फैसला नहीं बल्कि भ्रम फैलाकर आशंकाएं फैलाकर उस को आधार बनाया जा रहा है।''

उन्होंने कहा, ''दुष्प्रचार किया जाता है कि फैसला तो ठीक है लेकिन पता नहीं इससे आगे चलकर क्या-क्या होगा। फिर कहते हैं कि ऐसा होगा जो अभी हुआ ही नहीं है, जो कभी होगा ही नहीं, उसको लेकर समाज में भ्रम फैलाया जाता है। ऐतिहासिक कृषि सुधारों के मामले में भी जानबूझकर यही खेल खेला जा रहा है। हमें याद रखना है यह वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है।''

मोदी ने पिछली सरकारों पर प्रहार करते हुए कहा, ''एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) तो घोषित होता था लेकिन एमएसपी पर खरीद बहुत कम की जाती थी, घोषणाएं होती थी, खरीद नहीं होती थी। सालों तक एमएसपी को लेकर छल किया गया है। किसानों के नाम पर बड़े-बड़े कर्ज माफी के पैकेज घोषित किए जाते थे, लेकिन छोटे और सीमांत किसानों तक यह पहुंचते ही नहीं थे यानी कर्ज माफी को लेकर भी छल किया गया किसानों के नाम पर बड़ी-बड़ी योजनाएं घोषित होती थी लेकिन वह खुद मानते थे कि एक रुपए में से सिर्फ 15 पैसे ही किसान तक पहुंचते हैं।''

प्रधानमंत्री ने कहा, ''सफल प्रकल्प ही काफी नहीं होता। किसानों को बड़े और व्यापक बाजार का लाभ भी मिलना चाहिए। इसलिए विकल्प के माध्यम से किसानों को सशक्त करने का रास्ता अपनाया गया है, किसान हित में किए गए कृषि सुधार ऐसे ही विकल्प किसानों को देते हैं।''

उन्होंने कहा ''भारत के कृषि उत्पाद पूरी दुनिया में मशहूर है। क्या किसान की इस बड़े मार्केट और ज्यादा दाम तक पहुंच होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए, अगर कोई पुराने सिस्टम से ही लेन देन को ठीक समझता है तो उस पर भी इस कानून में कहां कोई रोक लगाई गई है? नए कृषि सुधारों से किसानों को नए विकल्प और नए कानूनी संरक्षण ही तो दिए गए हैं।''

मोदी ने कहा, ''पहले तो मंडी के बाहर हुए लेनदेन ही गैरकानूनी माने जाते थे। ऐसे में छोटे किसानों के साथ अक्सर धोखा होता था, विवाद होते थे क्योंकि छोटा किसान तो मंडी पहुंच ही नहीं पता था। अब ऐसा नहीं है। अब छोटे से छोटा किसान भी मंडी से बाहर हुए हर सौदे को लेकर कानूनी कार्यवाही कर सकता है, यानी किसान को अब नए विकल्प भी मिले हैं और उसे धोखे से बचाने के लिए कानूनी संरक्षण भी मिला है।''

उन्होंने कहा, ''किसानों को प्रकल्प के साथ ही नए विकल्प देने से हमारे कृषि क्षेत्र का कायाकल्प हो सकता है। किसान के लिए विकल्प सरकार का प्रकल्प और दोनों साथ-साथ चलें तभी देश का कायाकल्प हो सकता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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