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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर आरोप लगाने वाली पूर्व कर्मचारी नहीं भाग लेंगी आंतरिक समित कार्यवाही में

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: May 1, 2019 08:16 IST

आरोप लगाने वाली पूर्व कर्मचारी ने कहा कि समिति ने बिना वीडियो या ऑडियो रिकार्डिंग के कार्यवाही संचालित की। समिति में शीर्ष अदालत की दो महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी शामिल हैं। 

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ठळक मुद्देचीफ जस्टिस पर आरोप लगाने वाली महिला ने कहा है कि उसे अपनी सुरक्षा की चिंता है।महिला ने आशंका जताई है कि उसे समिति से न्याय मिलने की संभावना नहीं है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मी ने मंगलवार को मामले में जांच कर रही आंतरिक समिति के माहौल को ‘बहुत डरावना’ बताया। उन्होंने अपने वकील की मौजूदगी की अनुमति नहीं दिये जाने समेत अनेक आपत्तियां जताते हुए आगे से समिति के सामने पेश नहीं होने का फैसला किया। 

उसने कहा कि उसे अपनी सुरक्षा की भी फिक्र है क्योंकि कार्यवाही से लौटते वक्त दो से चार लोगों ने उसका पीछा किया। न्यायमूर्ति एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति के समक्ष तीन दिन तक कार्यवाही में भाग लेने के बाद महिला ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की। 

साथ ही यह आशंका भी जताई कि उसे समिति से न्याय मिलने की संभावना नहीं है जिसने न केवल कार्यवाही के दौरान उसकी वकील वृंदा ग्रोवर की मौजूदगी के अनुरोध को खारिज कर दिया बल्कि उसे यह भी कहा कि अगर वह भाग नहीं लेगी तो वह एकपक्षीय कार्यवाही करेगी। 

पूर्व कर्मचारी ने कहा कि समिति ने बिना वीडियो या ऑडियो रिकार्डिंग के कार्यवाही संचालित की। समिति में शीर्ष अदालत की दो महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी शामिल हैं। 

महिला ने कहा कि उसे 26 से 29 अप्रैल को दर्ज किये गये उसके बयान की प्रति भी नहीं दी गयी। महिला ने कहा, ‘‘मुझे लगा कि इस समिति से मुझे न्याय नहीं मिलने वाला इसलिये मैं तीन न्यायाधीशों की समिति की कार्यवाही में अब और हिस्सा नहीं लूंगी।’’ 

महिला ने कहा कि समिति ने कॉल डेटा रिकॉर्ड और दो संबंधित मोबाइल नंबरों के व्हाट्स ऐप ब्योरे को पेश करने के उसके अनुरोध को मंगलवार को खारिज कर दिया, जिसने उसे समिति की कार्यवाही में हिस्सा लेने से लाचार और परेशान कर दिया। 

उसने कहा, ‘‘मैं आज समिति की कार्यवाही छोड़ने के लिए बाध्य हूं क्योंकि समिति इस बात को स्वीकार करती नहीं दिखती कि यह साधारण शिकायत नहीं है बल्कि एक वर्तमान सीजेआई के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत है और इसलिए ऐसी प्रक्रिया अपनाना जरूरी है जो निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करेगी।’’ 

महिला ने दावा किया कि समिति ने उससे बार-बार पूछा कि उन्होंने यौन उत्पीड़न की यह शिकायत इतनी देरी से क्यों की। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे समिति का माहौल बहुत डरावना लगा और मैं उच्चतम न्यायालय के तीन जजों के सामने होने और उनके सवालों की वजह से बहुत घबराई रही, जहां मेरे वकील मौजूद नहीं थे।’’ 

महिला ने कहा, ‘‘मैंने सोचा था कि यह समिति मेरी पीड़ा को सुनेगी और अंतत: मेरे और मेरे परिवार के साथ न्याय होगा।’’ 

टॅग्स :सुप्रीम कोर्ट
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