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चीफ जस्टिस यूयू ललित ने पटना में कहा कि 'वकील वो आदमी होता है, जिसे रूल ऑफ लॉ को संभालना होता है'

By एस पी सिन्हा | Updated: September 24, 2022 20:05 IST

सीजेआई यूयू ललित ने पटना में कहा कि वकीलों की सामाजिक भूमिका काफी बड़ी हैं और उन्हें बड़ी ताकत के साथ आम लोगों से सम्बंधित मुद्दों को उठाना चाहिए।

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ठळक मुद्देसीजेआई यूयू ललित ने पटना में वकीलों की उनकी शक्ति और संवैधानिक कर्तव्यों का एहसास दिलायावकीलों की समाज में बहुत बड़ी भूमिका है और उन्हें आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहिएवकील इस समाज का वह शख्स होता है, जिसे रूल ऑफ लॉ को संभालना होता है

पटना: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) यूयू ललित शनिवार को पटना के बापू सभागार में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित एक सेमिनार में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने वकीलों की शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि आम लोगों से जुड़े मुद्दे को उठाने की ताकत वकीलों में ही है।

सीजेआई ने कहा कि वकीलों की सामाजिक भूमिका काफी बड़ी हैं, लेकिन उन्हें आम लोगों से सम्बंधित मुद्दे उठाने की बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि स्वतन्त्रता संग्राम में अग्रिम पंक्ति में वकीलों ने ही स्वतन्त्रता संग्राम को नेतृत्व दिया।

सीजेआई ने कहा कि 'वकील वो आदमी होता है जो रूल ऑफ लॉ को संभाले। उसका मान रखे। दूसरा वो हर बात में कारण खोजता है। इसकी वो हमेशा कोशिश करता है। तीसरी वो हर बात को नेशनल स्तर पर सोचता है।'

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा के वक्त सिर्फ नमक को ही क्यों चुना? क्योंकि, नमक आदमी की जिंदगी में बहुत अहम है। वकीलों के पास काफी ताकत है। इसी के आधार पर आपको आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि एक कैनवैसिंग पावर वकील में होती है। इसे और मजबूत करना चाहिए। इसका इस्तेमाल सही से समाज में होना चाहिए।

वहीं, केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने सेमिनार को सम्बोधित करते हुए कहा कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को एक टीम की तरह देश के कल्याण के लिए काम करना होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और हाईकोर्ट और वकील के सहयोगी इन्हें काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि लगभग नौ हजार करोड़ रुपए निचली अदालतों में बुनियादी सुविधाएं के लिए रखे गए, लेकिन उस राशि का पूरा उपयोग नहीं किया गया। ये अफसोस की बात है। जस्टिस डिलीवरी मैकेनिज्म मजबूत कैसे हो? इस पर फोकस करें। सिर्फ जज की संख्या बढ़ाने से यह मजबूत नहीं होगा।

मंत्री ने कहा कि केस के डिले होने से चिंता बढ़ती है। हमारे लिए दुःख की बात है कि 10 से 15 साल तक केस पेंडिंग रहता है। किरण रिजिजू ने कहा कि जब मंत्री बना तो 4 करोड़ 25 लाख केस पेंडिंग थे। कोरोना की वजह से इसकी संख्या बढ़कर 4 करोड़ 80 लाख हो गई है। कानून मंत्री ने कहा कि मेरे पास कई वीडियो आते हैं। हाईकोर्ट के वीडियो को मैं ऑब्जर्व करता हूं। कई खामियां दिखीं। सोशल मीडिया में जजों पर जो टिप्पणी होती है, वो सही नहीं है। इस मामले में ठोस कदम उठाना होगा। कार्रवाई होनी चाहिए। लाइव स्ट्रीमिंग में ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा कि पिछले 8 साल में नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक भी ऐसा कदम नहीं उठाया, जिससे न्यायपालिका को नुकसान हो। न्यायपालिका से हम उम्मीद करते हैं कि अपने दायरे और संविधान में रहकर सम्मान भाव से काम करें ताकि मधुर संबंध बना रहे। जज-वकील और सरकार को अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए। जब वह बोल रहे थे तो मंच पर सीजेआई न्यायमूर्ति यूयू ललित, पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और सुप्रीम कोर्ट के 6 जज मौजूद थे।

बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया और बिहार राज्य बार कॉउंसिल द्वारा संयुक्त रूप से शनिवार को पटना के बापू सभागार में वकीलों के सामाजिक दायित्व के विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के 6 जज भी शामिल हुए। इनमें न्यायाधीश संजय किशन कॉल, एमआर शाह, बीआर गवई, जेके महेश्वरी, एमएम सुंदरेश और पीए नरसिम्हा शामिल हुए और अपने विचार व्यक्त किये।

इनके साथ ही पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और कई जज शामिल हुए। कई पूर्व जज भी मौजूद थे। सभी राज्यों के बार काउंसिल के अधिकारी, सदस्यों के साथ ही अकेले बिहार से करीब 7 से 8 हजार वकील शामिल हुए।

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