लाइव न्यूज़ :

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, "कानून का प्रयोग प्रताड़ना के लिए नहीं बल्कि न्याय के लिए होना चाहिए"

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: November 12, 2022 22:02 IST

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने एक कार्यक्रम में कहा कि कानून का प्रयोग न्याय के लिए होना चाहिए न कि इसके जरिये किसी को प्रताड़ित किया जाए।

Open in App
ठळक मुद्देचीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कभी-कभी कानून और न्याय आवश्यक रूप से समान पथ पर नहीं चलते हैंकानून न्याय पाने का साधन होता है, लेकिन कभी-कभी यही कानून उत्पीड़न का भी साधन बन जाता हैहमें न्यायपालिका की गरिमा को बनाये रखने के लिए कानून को न्याय के पथ पर लेकर चलना है

दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में बोलते हुए शनिवार को कहा कि नागरिकों से उम्मीदें रखना बहुत अच्छा है लेकिन हमें अपनी सीमाओं के साथ-साथ अदालतों की क्षमता को भी समझने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, "कभी-कभी कानून और न्याय आवश्यक रूप से एक ही पथ का अनुसरण नहीं करते हैं। कानून न्याय पाने के लिए एक साधन हो सकता है, लेकिन यही कानून उत्पीड़न का भी साधन हो सकता है। हम जानते हैं कि कैसे औपनिवेशिक काल से चले आ रहे कानून आज भी भारत की न्यायपालिका में और संवैधानिक दस्तावेजों में मौजूद है। वहीं कानून की किताबें आज उत्पीड़न के तौर पर भी प्रयोग में लायी जा सकती है।"

चीफ जस्टिस ने कहा, "तो ऐसी परिस्थिति में हम नागरिकों के रूप में यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कानून न्याय का साधन बने न कि उत्पीड़न का। मुझे लगता है कि इस विमर्श में सभी को शामिल होना चाहिए न कि सिर्फ हम जैसे जज जो उन्हीं कानून के आधार पर फैसले देते हैं।"

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, "न्यायिक संस्थानों को लंबे समय तक असरदार बनाए रखने के लिए करुणा की भावना, सहानुभूति की भावना और नागरिकों के दुख-दर्द के प्रति जवाबदेह होना होगा। जब जज कानून और न्याय के बीच सही संतुलन करेंगे तभी वो बतौर जज अपने मिशन को पूरा कर सकते हैं।"

उन्होंने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया ने सबसे बड़ी चुनौती पेश की है क्योंकि एक जज द्वारा अदालत में कहे गए हर छोटे शब्द की वास्तविक समय पर रिपोर्टिंग होती है और इसके साथ ही जज के तौर पर आपका लगातार मूल्यांकन किया जाता है।"

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, "आज के समय में जज द्वारा अदालत में कहे गए प्रत्येक शब्द की रीयल-टाइम रिपोर्टिंग होती है। आप में से जो वकील हैं वे अपने सहयोगियों को यह बताने में सक्षम होंगे कि अदालत में बातचीत के दौरान न्यायाधीश द्वारा कही गई हर बात से नहीं समझा जा सकता है कि जज के दिमाग या अंतिम निष्कर्ष से फैसला क्या होगा।"

जस्टिस चंद्रचूड़ ने अंत में कहा, "अदालतों में न्याय करने की प्रक्रिया कानूनी संवाद है। अदालत में वकीलों और न्यायाधीशों के बीच औपचारिक और अनौपचारिक प्रवाह से बातचीत होती है, जो सच्चाई को उजागर करने की दिशा में होती है।" (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

टॅग्स :DY Chandrachudsupreme courtCJI
Open in App

संबंधित खबरें

भारतअल्केमिस्ट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड केस से अलग हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन, आखिर कारण

क्राइम अलर्टमालदा में 7 न्यायिक अधिकारी को बनाया बंधक?, बागडोगरा हवाई अड्डे से मुख्य आरोपी अधिवक्ता मोफक्करुल इस्लाम अरेस्ट, अब तक 35 अरेस्ट, वीडियो

भारत7 न्यायिक अधिकारी और 9 घंटे तक बंधक?, मतदाता सूची से नाम हटाने पर बवाल, सीजीआई सूर्यकांत ने कहा-रात 2 बजे से निगरानी कर रहा?

भारतहिम्मत कैसे हुई ऐसा करने की?, वादी के पिता ने सीजेआई के भाई को फोन किया, नाराज न्यायाधीश ने कहा- क्या वह मुझे आदेश देंगे?

क्राइम अलर्टगुरुग्राम में 3 साल की बच्ची से बलात्कार?, उच्चतम न्यायालय ने कहा- आयुक्त से लेकर सब-इंस्पेक्टर तक नाकाम?, कानून का जरा भी सम्मान तो तबादला करो

भारत अधिक खबरें

भारतये तो ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है..., राघव चड्ढा ने AAP के खिलाफ किया नया वीडियो जारी

भारतWest Asia Conflict: युद्धग्रस्त ईरान में फंसे 345 भारतीय, आर्मेनिया के रास्ते वतन लौटे; भारत की कूटनीतिक जीत

भारतKotma Building Collapses: 4 मंजिला इमारत हुई जमींदोज, 2 लोगों की मलबे में दबकर मौत; कई अब भी फंसे

भारतगोदाम में भर रहे थे नाइट्रोजन गैस?, विस्फोट में 4 की मौत और 2 घायल

भारतPAN Card Update: घर बैठे सुधारें पैन कार्ड में मोबाइल नंबर या नाम, बस 5 मिनट में होगा पूरा काम; देखें प्रोसेस