गाजीपुर सीमा पर जश्न, कृषि कानून रद्द किए जाने की घोषणा के बाद भीड़ बढ़ने की संभावना

By भाषा | Updated: November 20, 2021 00:14 IST2021-11-20T00:14:58+5:302021-11-20T00:14:58+5:30

Celebration at Ghazipur border, crowd likely to increase after announcement of cancellation of agriculture law | गाजीपुर सीमा पर जश्न, कृषि कानून रद्द किए जाने की घोषणा के बाद भीड़ बढ़ने की संभावना

गाजीपुर सीमा पर जश्न, कृषि कानून रद्द किए जाने की घोषणा के बाद भीड़ बढ़ने की संभावना

गाजियाबाद, 19 नवंबर किसान आंदोलन का ऐतिहासिक केंद्र रहे, दिल्ली की सीमा पर स्थित- गाजीपुर में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की घोषणा के बाद शुक्रवार को जश्न का माहौल देखने को मिला।

हालांकि, गाजीपुर में प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने कहा कि संसद में कानूनों को निरस्त किए जाने तक विरोध समाप्त नहीं होगा।

सैकड़ों किसानों को उनके साल भर चले प्रदर्शन के बाद मिली “आधी जीत” का जश्न मनाते और दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमा पर एक-दूसरे को मिठाई खिलाते देखा गया।

बीकेयू के प्रवक्ता सौरभ उपाध्याय ने पीटीआई-भाषा से कहा, “हमारी दो मुख्य मांगें थीं। तीनों ‘काले’ कृषि कानून रद्द किए जाएं और नये कानून के माध्यम से फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने की वैधानिक गारंटी दी जाए। हमारा प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक दोनों मांगें नहीं मान ली जातीं।”

गुरु नानक जयंती के अवसर पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तीन कृषि कानून किसानों के फायदे के लिए थे लेकिन “हमारे सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद हम किसानों के एक वर्ग को मना नहीं पाए।” उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों का लक्ष्य किसानों, खासकर छोटे किसानों को सशक्त बनाना था।

बीकेयू के मीडिया प्रभारी धमेंद्र मलिक ने कहा, ‘‘ यह बस पहली जीत है जो किसानों की एकता, उनके बलिदान एवं संघर्ष के कारण आयी है।’’

उन्होंने एक बयान में दावा किया, ‘‘ वैसे इस जीत में हमारे 700 किसानों ने बलिदान दिया। सरकार इस शहादत के लिए जिम्मेदार है । यह बस प्रधानमंत्री का अहं था क्योंकि यह सिद्ध हो गया है यदि उन्होंने चाहा होता तो ये कानून निरस्त हो गये होते।’’

मलिक ने इस बात पर अफसोस जताया कि प्रदर्शन के दौरान किसानों को ‘खालिस्तानी’ या ‘आंदोलनजीवी’ कहा गया है लेकिन कृषक समुदाय ने धैर्य कभी नहीं खोया।

बीकेयू के गौतम बुद्ध नगर से पदाधिकारी, सुनील प्रधान ने कहा कि शाम तक गाजीपुर में भीड़ और बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “कई लोग कार्तिक मेला में शामिल होने के लिए गढ़ मुक्तेश्वर गए हैं और गंगा में डुबकी लगाकर वापस आएंगे।”

प्रधान ने कहा, “यहां गाजीपुर में जश्न पहले से ही शुरू हो गया है। लेकिन यह केवल आधी जीत है क्योंकि एमएसपी पर कानून समेत अन्य मुद्दों पर घोषणा अब भी बाकी है।”

बीकेयू ने कहा कि प्रदर्शन पर आगे फैसला संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) द्वारा लिया जाएगा। उसने कहा कि प्रधानमत्री को प्रदर्शनकारियों की मौत पर संसद में दुख प्रकट करना चाहिए।

बीकेयू संयुक्त किसान मोर्चा का हिस्सा है जो दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे किसान संगठनों का प्रमुख समूह है।

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