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प्रियंका गांधी से निपटने के लिए बीजेपी की रणनीति तैयारः बेटी के मुकाबले बहू को उतारेंगे! 'प्लान-बी' के तहत कुमार विश्वास से भी बातचीत जारी

By संतोष ठाकुर | Updated: January 24, 2019 09:49 IST

राहुल के इस कदम के बाद यह माना जा रहा है कि प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश की फूलपुर, अमेठी, रायबरेली या इलाहाबाद सीट से चुनावी समर में उतारा जा सकता है.

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नई दिल्ली, संतोष ठाकुर: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनावी छक्के का सामना करने के लिए भाजपा ने फौरी तौर पर केंद्रीय मंत्री स्मृती ईरानी को सामने किया है। माना जा रहा है कि 'बेटी' से मुकाबला करने के लिए 'बहू' को मैदान सौंपा जाएगा। हालांकि प्रदेश में सपा-बसपा के साथ अब कांग्रेस के लिए नए सिरे से घेराबंदी की योजना तैयार की जा रही है।

बता दें कि यूपी यह हिस्सा कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उसके बाद इंदिरा गांधी की भी कर्मस्थली रहा है। राहुल के इस कदम के बाद यह माना जा रहा है कि प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश की फूलपुर, अमेठी, रायबरेली या इलाहाबाद सीट से चुनावी समर में उतारा जा सकता है। इस स्थिति को भांपते हुए भाजपा खेमे में मंथन शुरू हो गया है। हालांकि पार्टी ने स्मृतीे को आगे किया और आज पहले हमले का जिम्मा उन्हें सौंपा। तभी उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह फैसला राहुल गांधी के फेल होने का प्रमाण है। 

उन्हें प्रियंका गांधी की बैसाखी की जरूरत पड़ ही गई। प्रियंका के मुकाबले सीधे तौर पर स्मृति को मैदान में उतारा जाए। ताकि चुनाव को 'बहू बनाम बेटी' का रूप दिया जा सके। वह उसी तरह की रोमांचक स्थिति बनाने का प्रयास करे जिस तरह से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोनिया गांधी के खिलाफ बेल्लारी से चुनाव लड़कर बनाया था। हालांकि सुषमा हार गईं थी। लेकिन, कांग्रेस को सारी मशीनरी लगानी पड़ी थी। 

इधर, यह भी कयास है कि राहुल गांधी के खिलाफ कुमार विश्वास को मैदान में उतारा जाए। जानकारों का कहना है कि भाजपा नेता उनके संपर्क में हैं। कांग्रेस के मास्टर स्ट्रोक के बाद उनके भाजपा में प्रवेश की संभावना और बढ़ गई है। हालांकि विश्वास गाजियाबाद सीट मांग रहे हैं। 

कांग्रेस के दांव पर भाजपा फंसाना चाहती है पेंच

कांग्रेस का प्रयास है कि वह प्रियंका गांधी के सहारे न केवल भाजपा को मनोबल के स्तर पर डराने का प्रयास करे, बल्कि सभी गैर भाजपा दल के बीच एक संभावित चमत्कारी नतीजे लाने में सक्षम होती कांग्रेस के तौर पर स्थापित हो। वहीं भाजपा भी कांग्रेस के इस बड़े दांव की राजनीति को पढ़ रही है और उसका प्रयास है कि ऐसे किसी भी स्थिति, जिसमें उसके कार्यकर्ता प्रियंका गांधी के आभामंडल के प्रभाव में आएं इससे पहले अपनी ओर से प्रियंका के खिलाफ आक्रमक रणनीति अपनाए। प्रियंका पर सवालों की ऐसी बौछार करे जिससे वह स्वयं दबाव महसूस करें।

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