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बीजेपी, कांग्रेस सहित कई पार्टियों ने चुनाव आयोग को अब तक नहीं दिया चुनावी बॉन्ड से मिले चंदे का ब्यौरा

By भाषा | Updated: June 5, 2019 05:02 IST

उल्लेखनीय है कि 12 अप्रैल को उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि वे सरकार की राजनीतिक दान योजना में मिले चंदे के दाताओं की सूची सीलबंद लिफाफे में आयोग को 30 मई तक सौंप दें।

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ठळक मुद्देएक तरफ सरकार दानदाताओं की पहचान गुप्त रखने की पक्षधर है, वहीं आयोग ने चुनावी चंदे में पारदर्शिता का हवाला देते हुये दानदाताओं की पहचान सार्वजनिक करने की पैराकारी की है।आयोग ने मई में यह समय सीमा खत्म होने से पहले सभी राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड से जुटाये गये चंदे का ब्यौरा देने की लिखित तौर पर ताकीद की थी।

भाजपा, कांग्रेस और द्रमुक सहित अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों ने लोकसभा चुनाव के दौरान निर्धारित समयसीमा के भीतर जुटायी गयी चंदे की रकम का अब तक चुनाव आयोग को ब्यौरा नहीं दिया है। आयोग के सूत्रों ने मंगलवार को किसी प्रमुख दल की ओर से इस बारे में ब्यौरा नहीं मिलने की पुष्टि की है। उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार 30 मई तक सभी राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड से जुटाये गये चंदे का ब्यौरा चुनाव आयोग को देना था।

बहरहाल, कांग्रेस ने कहा कि उसके नेता मोतीलाल वोरा ने 30 मई को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और निर्वाचन आयोग (ईसी) को पत्र लिखकर बैंक से उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करने और चुनाव आयोग को सीलबंद लिफाफे में सूचना देने के लिए कहा था क्योंकि पार्टी को भी नहीं मालूम कि किसने ये बॉन्ड खरीदे। कांग्रेस ने कहा कि उसने बैंक से ईसी को सूचना देने के लिए कहा था। आयोग ने मई में यह समय सीमा खत्म होने से पहले सभी राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड से जुटाये गये चंदे का ब्यौरा देने की लिखित तौर पर ताकीद की थी।

30 मई को सौंपना था ब्यौरा

आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस और द्रमुक ने "कम से कम" अभी तक ब्यौरा नहीं दिया है। उल्लेखनीय है कि 12 अप्रैल को उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि वे सरकार की राजनीतिक दान योजना में मिले चंदे के दाताओं की सूची सीलबंद लिफाफे में आयोग को 30 मई तक सौंप दें। इस योजना में दानदाताओं की पहचान सार्वजनिक करने के बारे में आयोग और सरकार के बीच विरोधाभास बरकरार है।

एक तरफ सरकार दानदाताओं की पहचान गुप्त रखने की पक्षधर है, वहीं आयोग ने चुनावी चंदे में पारदर्शिता का हवाला देते हुये दानदाताओं की पहचान सार्वजनिक करने की पैराकारी की है। इस बारे में अदालत के समक्ष आयोग ने कहा था कि उसका नजरिया सिर्फ राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता तक सीमित है, इसका योजना की खूबियों और खामियों से कोई संबंध नहीं है। इस योजना के तहत कोई भी भारतीय नागरिक या भारत में स्थापित एवं संचालित निकाय किसी राजनीतिक दल को बैंक से चुनावी बॉन्ड खरीद कर चंदा दे सकता है।

जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 29 ए के तहत पंजीकृत ऐसा कोई भी राजनीतिक दल चुनावी बॉन्ड से चंदा ले सकता है जिसे लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कम से कम एक प्रतिशत वोट मिला हो। योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक की देश की 29 शाखाओं को पिछले साल एक से दस नवंबर के बीच चुनावी बॉन्ड जारी करने के लिये अधिकृत किया गया था। 

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