पटनाः बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। एक ओर जहां एक ओर एनडीए अपनी चार सीटों पर गणित बिठा रहा है, वहीं विपक्षी खेमे में राजद ने ‘एक सीट’ पर कब्जा जमाने के लिए एक नया और चौंकाने वाला फॉर्मूला पेश किया है। बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर एनडीए के तीन और महागठबंधन के दो सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इस बीच जीतन राम मांझी ने एक सीट को लेकर एनडीए नेतृत्व को पुराने वादे की याद दिलाई है। उन्होंने एनडीए में अपनी दावेदारी पेश कर एक नई हलचल मचा दी है।
बिहार राज्यसभा चुनावः जीतन राम मांझी ने अपना दांव चला
हालांकि, दावेदारी रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की भी है। बता दें कि बिहार की पांच सीटों में चार पर तो एनडीए की जीत पक्की मानी जा रही है और इसका कोटा भी जदयू और भाजपा के बीच पहले से तय कहा जा सहा है। लेकिन, पेच पांचवीं सीट को लेकर है। अब इस सीट को लेकर जीतन राम मांझी ने अपना दांव चल दिया है।
दरअसल, यह अहम इसलिए है क्योंकि वर्तमान राजनीति में एनडीए खेमा पांचवीं सीट जीतने की कवायद में राजद, कांग्रेस, वाम, एआईएमआईएम और अन्य छोटी पार्टियों से तीन विधायकों को अपने पाले में करने की जुगत में लगा है तो मांझी की यह डिमांड एनडीए की टेंशन बढ़ा रही है। जबकि उपेन्द्र कुशवाहा की भी दावेदारी है।
बिहार राज्यसभा चुनावः 2 लोकसभा और 1 राज्यसभा सीट देने की बात
ऐसे में जीतन राम मांझी ने एनडीए के भीतर सस्पेंस बढ़ा दिया है। जीतन राम मांझी ने स्पष्ट तौर पर उस वादे की याद दिलाई है, जिसमें उनकी पार्टी को 2 लोकसभा और 1 राज्यसभा सीट देने की बात कही गई थी। मांझी का यह कहना कि ‘हम मांग नहीं करेंगे, बल्कि इंतजार करेंगे’ राजनीतिक गलियारों में एक मूक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं, क्या एनडीए नेतृत्व अपने इस पुराने साथी की उम्मीदों पर खरा उतरेगा या छोटे दलों की दावेदारी सीट बंटवारे के समीकरण को उलझा देगी? जीतन राम मांझी का यह भी कहना कि “हम आखिरी तक देखेंगे कि वे देते हैं या नहीं।” यह संकेत देता है कि हम इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।
बिहार राज्यसभा चुनावः 5 सीटों में से बहुमत के हिसाब से एनडीए मजबूत
जीतन राम मांझी का गठबंधन के बड़े दलों पर एक नैतिक दबाव बनाने की कोशिश मानी जा रही है। ऐसे में बिहार एनडीए के लिए राज्यसभा का यह चुनाव किसी परीक्षा से कम नहीं है। उल्लेखनीय है कि जीतन राम की पार्टी पहले भी राज्यसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की इच्छा जता चुकी है। बिहार की 5 राज्यसभा सीटों में से बहुमत के हिसाब से एनडीए मजबूत स्थिति में है।
लेकिन असली चुनौती आंतरिक असंतोष को रोकने की है। जीतन राम मांझी का आधार वोट बैंक बिहार की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाता है, जिसे कोई भी गठबंधन नजरअंदाज नहीं करना चाहेगा। मांझी के इस बयान के बाद अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिल्ली में भाजपा के आलाकमान पर टिकी हैं।
बिहार राज्यसभा चुनावः हिना शहाब एक ऐसी उम्मीदवार हो सकती
उधर, राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने सुझाव दिया है कि अगर पूर्व सांसद दिवंगत शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को मैदान में उतारा जाता है, तो विपक्ष न केवल एकजुट होगा बल्कि जीत भी सुनिश्चित कर लेगा। भाई वीरेंद्र ने अपनी व्यक्तिगत राय रखते हुए कहा कि राज्यसभा की इस सीट पर किसी अकलियत (अल्पसंख्यक) चेहरे को मौका मिलना चाहिए।
उन्होंने हिना शहाब का नाम लेते हुए तर्क दिया कि चुनाव जीतने के लिए ‘गोटी बैठाना’ पड़ता है। भाई वीरेंद्र ने कहा कि मैं व्यक्तिगत राय दे रहा हूं कि अकलियत के भाई को ही राज्यसभा जाना चाहिए। भाई वीरेंद्र के मुताबिक, हिना शहाब एक ऐसी उम्मीदवार हो सकती हैं जिनके नाम पर विपक्षी दलों के बीच आम सहमति बन सकती है।
बिहार राज्यसभा चुनावः एआईएमआईएम के उम्मीदवार का समर्थन करना
उनका इशारा साफ था कि अगर राजद हिना शहाब को टिकट देती है तो ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के लिए उनका विरोध करना मुश्किल होगा। यह फॉर्मूला न केवल राजद के पुराने वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश है, बल्कि बिखरे हुए विपक्ष को एक मंच पर लाने की कवायद भी मानी जा रही है।
जबकि, एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने पहले ही घोषणा कर दी है कि उनकी पार्टी राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारेगी। ईमान का कहना है कि यदि विपक्ष वास्तव में सांप्रदायिक शक्तियों को रोकना चाहता है, तो उसे एआईएमआईएम के उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए।