पटना: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से ही सियासत गरमाने लगी है। इसी कड़ी में कभी एनडीए के सहयोगी रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं रालोजपा प्रमुख पशुपति कुमार पारस अचानक से सुर्खियों में आ गए हैं। पारस रविवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मुलाकात करने राबड़ी आवास पर पहुंच गए। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक मुलाकात हुई। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे। जबकि पारस के साथ पूर्व सांसद प्रिंस पासवान भी थे। बता दें कि 15 जनवरी को लालू यादव पशुपति कुमार पारस के निमंत्रण पर उनके कार्यालय पहुंचे थे।
उस दौरान लालू यादव ने संकेत दिया था कि भविष्य में पशुपति कुमार पारस महागठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं। ऐसे में दोनों के बीच हुई मुलाकात को अहम मानी जा रही है। इस दौरान लालू यादव और उनके बीच में किन बातों को लेकर चर्चा हुई, इस पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन तेजस्वी यादव के करीबी और राज्यसभा सांसद संजय यादव ने पत्रकारों को बताया कि पशुपति कुमार पारस और लालू यादव में क्या बातचीत हुई।
उन्होंने कहा कि स्वाभाविक बात है पशुपति कुमार पारस राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े व्यक्ति हैं और लालू यादव से उनकी मुलाकात हो रही है तो निश्चित तौर पर राजनीतिक मुलाकात होगी। पशुपति कुमार पारस बिहार में लंबे समय से राजनीति कर रहे हैं तो निश्चित तौर पर अगर महागठबंधन-इंडिया गठबंधन में आते हैं तो आते के इसका फायदा होगा। वहीं दोनों नेताओं की मुलाकात से सियासी हलचल तेज है।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में एनडीए में तरजीह नहीं मिलने के कारण पारस नाराज चल रहे हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद पारस ने कहा था कि वो एनडीए के हिस्सा हैं। वहीं अब पारस के द्वारा लालू यादव का दरवाजा खटखटाए जाने के बाद यह माना जा रहा है कि वह एनडीए को बड़ा झटका देते हुए महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं।
वहीं, सियासी गलियारे में यह चर्चा शुरू हो गई है कि पारस को लालू यादव ने ऑक्सीजन दे दिया है। मोदी सरकार-2 में केंद्रीय मंत्री बनकर पारस ने चिराग पासवान को जो घाव दिया था, उसकी भरपाई लालू यादव का सकते हैं। सियासी गलियारे में चर्चा है कि लालू यादव ने सुरजभान सिंह और पशुपति कुमार पारस दोनों को बड़ा टास्क दिया है।
लालू के इस टास्क से लोजपा(रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान को घेरा जाएगा। इसके तहत मुंगेर, वैशाली, बेगूसराय, खगड़िया, नवादा, जमुई और हाजीपुर संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाले विधानसभा सीटों पर चिराग पासवान की पार्टी के प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचाया जाएगा।
बता दें कि एनडीए में पशुपति कुमार पारस की जगह चिराग पासवान को तरजीह दी गई, इससे वे नाराज चल रहे हैं। हालांकि, लोकसभा चुनाव के बाद भी पारस एनडीए में बने रहे। इस दौरान नीतीश सरकार ने वो बंगला भी छीन लिया, जिसमें उनकी पार्टी का कार्यालय था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बंगले को भी चिराग पासवान की पार्टी को सौंप दिया।