पटनाः बिहार की सियासत में इस समय एक बड़ा सवाल यही चर्चा का विषय बना हुआ है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद भाजपा आखिर किस नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाएगी? यह बात अभी पर्दे के पीछे ही है कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बदली हाव-भाव के कारण चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। सम्राट चौधरी के इस अंदाज को लेकर भाजपा के कई नेता भी कयास लगा रहे हैं। पार्टी के अंदर यह चर्चा चल रही है कि क्या यह किसी बड़े राजनीतिक संकेत की तरफ इशारा है? हालांकि भाजपा के लोगों के मन में चाहत है कि कोई निर्विवाद व्यक्ति ही मुख्यमंत्री बने। लेकिन कुछ नेताओं को उम्मीद है कि आने वाले समय में उनकी किस्मत भी बदल सकती है। इसके अलावा समृद्धि यात्रा के दौरान मधेपुरा जिले से एक तस्वीर सामने आई थी।
बिहार की राजनीति में उस तस्वीर को लेकर जबरदस्त चर्चा हुई। हैरानी की बात यह रही कि मधेपुरा जैसी तस्वीरें किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और सहरसा तक देखने को मिली। आलम यह रहा कि आज सहरसा में तो नीतीश कुमार ने न सिर्फ इशारा किया बल्कि थोड़ा आगे बढ़ते हुए कयासों के दौर को खत्म करने की कोशिश भी की।
यानि बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर नीतीश कुमार ने भले कुछ साफ तौर पर नहीं कहा है। लेकिन, वह जिस तरह से सम्राट चौधरी का हाथ पकड़कर उन्हें मंच पर आगे लेकर आ रहे हैं, उससे कई संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। शुक्रवार को सहरसा में भी नीतीश कुमार सम्राट चौधरी का हाथ पकड़कर उनको आगे लेकर लाए। साथ ही लोगों से कहा कि अब इन पर पर ध्यान दीजिये।
वहीं इससे पहले भी समृद्धि यात्रा के दौरान नीतीश कुमार ने मंच से कई बार यह कहा कि अब ये लोग मिलकर बिहार का विकास करेंगे। अब ऐसे में ये इशारे बार-बार सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाने की बात की तरफ बढ़ते नजर आते हैं। कहा जाए तो बाहर से सब कुछ सामान्य दिख रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर हलचल तेज है।
पर्दे के पीछे कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सम्राट चौधरी के इस अंदाज को लेकर भाजपा के कई नेता भी कयास लगा रहे हैं। हालांकि, शुरू से पार्टी के लिए खून पसीना बहाने वाले भाजपा के नेता नहीं चाहते कि कोई विवादास्पद और आयातित नेता सत्ता की कमान संभाले।
पार्टी नेताओं ने आफ दी रिकार्ड कहा कि सम्राट चौधरी भले ही अभी भाजपा के लिए अपनी सब कुछ न्योछावर करने का बात कह रहे हों, लेकिन समय के साथ उनका भाव भी बदलता रहा है। जैसे की राजद के साथ हुआ। भाजपा के लोगों की इच्छा है कि संघ पृष्ठभूमि वाला कोई मुख्यमंत्री बने अथवा किसी महिला को मुख्यमंत्री की जिम्मेवारी सौंपी जाये।
उधर, सम्राट चौधरी भी सभाओं में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खुलकर तारीफ कर रहे हैं. वे लोगों को भरोसा दिला रहे हैं कि आगे भी सरकार उसी सोच के साथ चलेगी, जिस दिशा में नीतीश कुमार ने बिहार को आगे बढ़ाया है। वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पहले ही यह कह चुके हैं कि नई सरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनेगी।
इसका मतलब यह माना जा रहा है कि भाजपा जब अपना मुख्यमंत्री चुनेगी, तब नीतीश की राय भी अहम भूमिका निभा सकती है। ऐसे में सियासत के जानकारों का मानना है कि बड़े राजनीतिक मंचों पर नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और तस्वीरें कई बार भविष्य की राजनीति की झलक भी दिखाते हैं।
ऐसे में इस तस्वीर के सामने आने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि बिहार की राजनीति में आगे क्या समीकरण बन सकते हैं? उधर, सियासी गलियारों में चर्चा है कि नया मुख्यमंत्री पिछड़ी जातियों (ओबीसी) या अति पिछड़ी जातियों (ईबीसी) से हो सकता है। यह वही सामाजिक वर्ग है जिसे नीतीश कुमार का मजबूत वोट बैंक माना जाता है।
भाजपा में मुख्यमंत्री पद के लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, नित्यानंद राय, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल, संजीव चौरसिया के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। जबकि महिला में श्रेयसी सिंह के अलावे कई अन्य के नामों की भी चर्चा है। बता दें कि बिहार विधानसभा में भाजपा के पास 89 विधायक हैं। इसके अलावा 22 विधान पार्षद, 4 राज्यसभा सांसद और 12 लोकसभा सांसद भी पार्टी के पास हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर कई नेता मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं।
राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को पूरा हो जाएगा। इसके बाद पॉलिटिकल एक्टिविटीज और तेज हो सकती हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ हफ्तों में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर स्थिति साफ हो सकती है। फिलहाल सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है। अंतिम फैसला नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के हाथ में होगा। यही तय करेंगे कि बिहार में भाजपा का पहला मुख्यमंत्री कौन बनेगा।
उधर, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण बिहार में गैस की किल्लत का आज चौथा दिन है और हालात बेकाबू होते दिख रहे हैं। इस बीच, सम्राट चौधरी के कर्मचारी की दबंगई सामने आई है। पटना के गर्दनीबाग स्थित एक गैस एजेंसी के मालिक सोनल कुमार ने प्रशासन और सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाया है।
उनका दावा है कि बुधवार को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ओएसडी एजेंसी पर आए और 15 सिलेंडरों की मांग की। एजेंसी मालिक के मुताबिक, गोदाम में केवल 4 सिलेंडर बचे थे, जिन्हें वे वीवीआईपी लोग उठा ले गए। इसे लेकर उन्होंने कहा कि “वो बड़े लोग हैं, उन्हें मना करना हमारे बस में नहीं है।”
ऐसे में सवाल यह उठने लगा है कि अगर उपमुख्यमंत्री के रहते यह हाल है तो अगर मुख्यमंत्री बनेंगे तो क्या हाल होगा? फिर तो "सैंया भये कोतवाल अब डर काहे का।" लोग तो यह ही कहने लगे हैं कि अगर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बना दिया गया तो राजद के शासनकाल की यादें ताजी हो जा सकती हैं।