पटनाः जनता दल यूनाइटेड(जदयू) में जारी हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की अधिसूचना के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 19 मार्च को नामांकन दाखिल करेंगे। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना लगभग तय हो गया है। 24 मार्च को नीतीश कुमार निर्विरोध चुना जाना महज एक औपचारिक अमल नहीं, बल्कि पार्टी के अंदरूनी समीकरणों और बिहार की सत्ता संरचना में संभावित बदलाव का संकेत माना जा रहा है। पार्टी के अंदर यह चर्चा आम है कि पटना में प्रस्तावित राष्ट्रीय परिषद और कार्यकारिणी की बैठक संगठन के लिए नई दिशा और सियासी नक्शा तय करेगी।
पार्टी सूत्रों ने बताया है कि पटना में राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित करने की तैयारी चल रही है। हालांकि, तारीख अभी तय नहीं हुई है। लेकिन इसमें देश भर के जदयू डेलिगेट्स इस बैठक में शामिल होंगे। कहा जा रहा है कि यह बैठक संगठन मजबूती और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेगी।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दिल्ली की ओर बढ़ते कदम और बिहार में संभावित नेतृत्व परिवर्तन के बीच सबकी नजर अब पटना की इस बैठक पर टिक गई है कि इसमें कौन-कौन से बड़े फैसले होने वाले हैं। बता दें कि नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा चुनाव में नामांकन दाखिल किया और सदस्य बन गए।
अब वे बिहार की मुख्यमंत्री पद से हटने या फोकस बदलने की ओर बढ़ रहे हैं। दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की अटकलें तेज हैं। जदयू सूत्र कहते हैं कि राज्यसभा सदस्य रहते हुए भी वे पार्टी की बागडोर अपने हाथ में रखेंगे। इसलिए यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है। इसमें नीतीश कुमार पार्टी नेताओं को अपने नए राजनीतिक कदमों से अवगत कराएंगे।
बिहार की सियासी स्थिति को देखते हुए आगे की योजना भी बनाई जाएगी। नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की संभावना के बीच यह बैठक पार्टी को एकजुट रखने और नए नेतृत्व के संकेत देने का मौका देगी। कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा की भूमिका भी जारी रहने की संभावना है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाने के संकेत मिले हैं। हाल में नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के साथ अपनी पहली यात्रा भी की। बैठक में इस मुद्दे पर भी बात होगी। पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं कि नीतीश बिहार में रहें, लेकिन दिल्ली शिफ्ट की तैयारी को देखते हुए उत्तराधिकारी तैयार करने की जरूरत है।
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी हाल में पार्टी में सक्रिय हुए हैं। यह बैठक परिवार और पार्टी दोनों की भूमिका तय करेगी। यह बैठक पार्टी के अंदर संभावित असंतोष को दूर करने और एकजुटता का संदेश देने का मंच भी बनेगी। इस तरह यह सियासी कवायद सिर्फ एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार से लेकर दिल्ली तक सत्ता संतुलन को प्रभावित करने वाली बड़ी चाल साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि नीतीश की यह नई पारी बिहार की सियासत को किस दिशा में मोड़ती है।