बिहार चुनाव में राजद हार और लालू यादव के खास मंगनी लाल मंडल की विदाई?, यूरोप दौरे से लौटे तेजस्वी, संगठन में करेंगे कई फेरबदल, वोट बैंक ट्रांसफर कराने में विफल

By एस पी सिन्हा | Updated: January 5, 2026 16:14 IST2026-01-05T16:13:37+5:302026-01-05T16:14:47+5:30

मंगनी लाल मंडल को जब अध्यक्ष बनाया गया था, तब लालू और तेजस्वी का मकसद 'माई' (एमवाय) समीकरण के साथ-साथ 'गैर-यादव' पिछड़ी जातियों को जोड़ना था।

bihar har rjd lalu yadav Defeat elections departure state president Mangani Lal Mandal Tejashwi Yadav returns Europe tour changes organization failed transfer vote bank | बिहार चुनाव में राजद हार और लालू यादव के खास मंगनी लाल मंडल की विदाई?, यूरोप दौरे से लौटे तेजस्वी, संगठन में करेंगे कई फेरबदल, वोट बैंक ट्रांसफर कराने में विफल

Mangani

Highlightsजानकारों के अनुसार उम्मीद के बावजूद ओवीसी वोट बैंक में अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा। कार्यकाल में अनुशासनहीनता और बागावत के मामलों में वृद्धि देखी गई।आंकड़ों ने साफ कर दिया कि मंडल जी वोट बैंक को ट्रांसफर कराने में पूरी तरह विफल रहे।

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राजद के भीतर के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया है। राजद नेता तेजस्वी यादव भी यूरोप दौरे से लौट आए हैं और इस सप्ताह से सक्रिय राजनीति में दिखे सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक करने वाले हैं, जिसमें आने वाले समय की रणनीति और संगठन की समीक्षा पर चर्चा होगी। लेकिन बिहार में राजद की हार के बाद सबसे अधिक चर्चा प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की संभावित विदाई को लेकर हो रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव अब मंगनी लाल मंडल को पद से मुक्त कर सकते हैं। मंगनी लाल मंडल को पद से हटाए जाने के पीछे दो प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं। जानकारों के अनुसार उम्मीद के बावजूद ओवीसी वोट बैंक में अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा।

साथ ही, उनके कार्यकाल में अनुशासनहीनता और बागावत के मामलों में वृद्धि देखी गई। मंगनी लाल मंडल को जब अध्यक्ष बनाया गया था, तब लालू और तेजस्वी का मकसद 'माई' (एमवाय) समीकरण के साथ-साथ 'गैर-यादव' पिछड़ी जातियों को जोड़ना था। लेकिन चुनावी आंकड़ों ने साफ कर दिया कि मंडल जी वोट बैंक को ट्रांसफर कराने में पूरी तरह विफल रहे।

अति-पिछड़ा वर्ग का वोट राजद के पाले में आने के बजाय बिखर गया। यही वजह है कि अब तेजस्वी को लगता है कि संगठन को एक ऐसे चेहरे की जरूरत है जो जादुई तरीके से वोटों को एकजुट कर सके। जानकारों की मानें तो मंगनी लाल मंडल की संभावित विदाई के पीछे केवल चुनावी हार ही नहीं, बल्कि अनुशासन की कमी भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है।

पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मंगनी लाल मंडल के कार्यकाल में राजद ने वह कड़ाई खो दी, जो पूर्व अध्यक्ष जगदानंद सिंह के दौर में हुआ करती थी। टिकट बंटवारे के समय जिस तरह से बागियों की फौज खड़ी हुई और पार्टी के भीतर गुटबाजी बढ़ी, उसने तेजस्वी की साख को नुकसान पहुंचाया। तेजस्वी अब एक ऐसे सारथी की तलाश में हैं जो संगठन में लोहे जैसा अनुशासन कायम कर सके।

2029 की लड़ाई के लिए कार्यकर्ताओं को फिर से चार्ज कर सके। इसके साथ ही राजद ने विभिन्न स्तरों पर 400 से अधिक भीतरघातियों की पहचान की है। जिला अध्यक्षों, प्रभारियों और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर रिपोर्ट तैयार की गई है। तेजस्वी पार्टी से खिलाफ काम करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं। वहीं, मकर संक्रांति के बाद तेजस्वी राज्यव्यापी यात्रा पर निकलेंगे।

जनता के बीच जाकर संगठन को मजबूत करने का प्रयास करेंगे। उनका अगला बड़ा लक्ष्य इस साल होने वाले पंचायत चुनाव हैं, जिनके जरिए राजद निचले स्तर पर पकड़ मजबूत करना चाहती है। राज्य में 8000 से अधिक पंचायतें हैं। छह पदों (मुखिया, वार्ड सदस्य, सरपंच, पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य) के लिए चुनाव होंगे।

बता दें कि अभी पिछले ही दिनों तेजस्वी यादव के निर्देश पर जिला और प्रमंडल स्तर पर जो मैराथन बैठकें हुई हैं। सूत्रों की मानें तो समीक्षा बैठकों में कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। यह बात सामने आई है कि चुनाव के दौरान पार्टी की जिला और प्रखंड कमेटियां केवल कागजों पर ही सक्रिय थीं, जमीन पर उनका कोई प्रभाव नहीं दिखा।

सबसे बड़ी शिकायत यह रही कि संगठन को मजबूत करने और पुराने कार्यकर्ताओं को तवज्जो देने के बजाय पार्टी बाहरी एजेंसियों और सर्वे रिपोर्टों पर ज्यादा निर्भर हो गई, जिसने राजद की जीत के रथ को बीच रास्ते में ही रोक दिया। ऐसे में तेजस्वी संगठन में बड़े बदलाव कर सकते हैं। सितंबर 2025 में मंगनी लाल मंडल ‎प्रदेश अध्यक्ष बने थे।

विधानसभा चुनाव ‎सिर पर देखते हुए प्रदेश और जिला कमेटियां ‎नहीं बन पाईं। प्रखंड अध्यक्ष भी आधे प्रखंड में ‎ही बनाए जा सके। तेजस्वी इस कमियों को जल्द दूर करेंगे। बताया जाता है कि तेजस्वी नए 50 जिलाध्यक्षों और करीब‎ 265 प्रखंड अध्यक्षों की नियुक्ति करेंगे। यह काम 1 महीने में किया जाना है।

‎14 जनवरी को मकर संक्रांति पर राबड़ी आवास 10 ‎सर्कुलर रोड में ‘चूड़ा दही’ भोज का आयोजन किया जाए या नहीं, इस पर फैसला लेंगे। मकर संक्रांति के दिन लालू-राबड़ी आवास ‎पर पूरे प्रदेश से राजद के नेता-कार्यकर्ता जुटते हैं। लालू प्रसाद ‎अभी आंख के ऑपरेशन के बाद दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ ‎ले रहे हैं। मकर संक्रांति पर उनके पटना लौटने की‎ संभावना है। उनकी बड़ी बेटी डॉ. मीसा भारती भी पटना आएंगी।

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