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बिहार: बाजार में सर्जिकल स्प्रीट मिलना मुश्किल, डॉक्टर हुए परेशान, जानें पूरा मामला

By एस पी सिन्हा | Updated: February 9, 2023 18:29 IST

पिछले दिनों जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद से स्वास्थ्य विभाग द्वारा ड्रग इंस्पेक्टरों से इसकी जांच कराई गई कि सर्जिकल उपयोग में आने वाली स्प्रीट की बिक्री कितनी हो रही है।

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ठळक मुद्देड्रग इंस्पेक्टरों ने बिहार की सबसे बड़ी दवा मंडी जीएम रोड में स्थित सभी दवा दुकानों को खंगालना शुरू किया।दुकानदारों के बीच भय ऐसा पैदा किया गया, मानों उन्हीं के द्वारा बेची गई सर्जिकल स्प्रीट से बिहार में मौतें हो रही हैं।दुकानदारों को सर्जिकल स्प्रीट बेचने के ऐसे मापदंड तय कर दिए गए मानों वह कोई अपराध करने वाला सामना बेच हो रहे हों।

पटना: बिहार में जहरीली शराब से हो रही मौतों के बाद मेडिकल गलियारे में त्राहिमाम मचा हुआ है। मेडिकल गलियारे में त्राहिमाम का कारण शराब नहीं बल्कि स्प्रीट है, जो बाजार में मिलना कठिन हो गया है। ऐसे में सर्जरी से जुड़े डॉक्टर परेशान हो गये हैं। मुश्किल यह है कि वह अपनी फरियाद करें तो किससे करें? परिणामस्वरूप ब्लैक में स्प्रीट खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि पिछले दिनों जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद से स्वास्थ्य विभाग द्वारा ड्रग इंस्पेक्टरों से इसकी जांच कराई गई कि सर्जिकल उपयोग में आने वाली स्प्रीट की बिक्री कितनी हो रही है। इस दौरान ड्रग इंस्पेक्टरों ने बिहार की सबसे बड़ी दवा मंडी जीएम रोड में स्थित सभी दवा दुकानों को खंगालना शुरू किया। 

दुकानदारों के बीच भय ऐसा पैदा किया गया, मानों उन्हीं के द्वारा बेची गई सर्जिकल स्प्रीट से बिहार में मौतें हो रही हैं। दुकानदारों को सर्जिकल स्प्रीट बेचने के ऐसे मापदंड तय कर दिए गए मानों वह कोई अपराध करने वाला सामना बेच हो रहे हों। दुकानदारों से पिछले एक साल में खरीद-बिक्री का ब्योरा मांगा जा रहा है। मसलन किसको कितना सर्जिकल स्प्रीट बेचा गया? खरीददार का विवरण भी दिया जाना है। 

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा दिए गएदिशा-निर्देशों का पालन करना दवा के कारोबार से जुड़े लोगों के लिए बन्दूक बेचने से ज्यादा भयावह है, जिसके चलते उन्होंने स्प्रीट बेचना बंद कर दिया है। परिणामस्वरूप बाजार में सर्जिकल स्प्रीट मिलना मुश्किल हो गया है। दवा मंडी में सर्जिकल स्प्रीट मिल नहीं पा रहा है। कहीं कोई चोरी-छुपे बेच भी रहा है तो वह ब्लैक में दे रहा है। इस तरह से शराबबंदी का हंटर अब मेडिकल से जुड़े लोगों पर भी चल गया है। लेकिन नीतीश सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, उनके लिए शराबबंदी ही अहम है।

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