पटनाः बिहार की सियासत में सत्ता हस्तांतरण की आहट सुनाई देने लगी है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र दे सकते हैं। दरअसल 29 मार्च तक विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही अवकाश पर है, जिसके बाद 30 मार्च सोमवार को वे अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री के पद से भी नीतीश कुमार 14 अप्रैल तक इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद खरमास समाप्ति के पश्चात नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो जायेगा। इसबीच जदयू के वरिष्ठ नेता एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि 9 अप्रैल तक का समय है, उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा कि नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला एनडीए की बैठक में लिया जाएगा।
नीतीश कुमार की इच्छा के अनुसार ही अगला मुख्यमंत्री चुना जाएगा। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर केवल अटकलें ही लगाई जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का पद छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं। राज्यसभा में मौजूदा सीट 9 अप्रैल को खाली होगा।
उम्मीद है कि वह इसके बाद राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। ऐसे में उनका दिल्ली जाना भी तय माना जा रहा है। संविधान के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति राज्यसभा का सदस्य बनता है, तो उसे 14 दिनों के अंदर अपनी राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है। इसके बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता साफ हो जाएगा और नई राजनीतिक परिस्थितियां सामने आएंगी।
नीतीश कुमार के बेटे निशांत भी पिछले दिनों जदयू में शामिल हुए हैं और उनके सियासी तौर पर अचानक से तेजी से सक्रिय होने से कई किस्म की अटकलें लग रही हैं। दावा किया जा रहा है कि बिहार में अगला मुख्यमंत्री भाजपा से होगा। हालांकि इसे लेकर अभी तक कोई भी भाजपा नेता अधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से बचते रहे हैं।
वैसे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से लेकर कई नेताओं के नामों की चर्चाएं लगातार जारी हैं। इसबीच विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार भी पिछले दिनों नागपुर गए थे और संघ मुख्यालय होकर आये थे। उनका अचानक से नागपुर जाना भी बिहार में भाजपा की सियासी खींचतान का करण ही माना जा रहा है। इसके पहले भाजपा विधायक संजीव चौरसिया सहित कई नेताओं ने संघ मुख्यालय में हाजिरी लगा दी है।
इस बीच जदयू के कुछ नेताओं द्वारा निशांत को राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग की जा रही है। कुल मिलाकर, अगर नीतीश कुमार इस्तीफा देते हैं, तो बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं और आने वाले समय में नई राजनीतिक रणनीतियां सामने आ सकती हैं।