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बिहार चुनावः तेजस्वी यादव बोले- लालू जी के शासन में गरीब सीना तान के बाबू साहब के सामने चलते थे, जदयू और भाजपा ने घेरा

By सतीश कुमार सिंह | Updated: October 26, 2020 16:59 IST

रोहतास के डेहरी में चुनाव प्रचार के दौरान राजद नेता ने कहा कि लालू जी के शासन में गरीब सीना तान के बाबू साहब के सामने चलते थे, जो कर्मचारी काम करेगा उसे सम्मान मिलेगा, जो गलत काम करेगा उसे सजा मिलेगी।...

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ठळक मुद्दे15 साल जो व्यक्ति (नीतीश कुमार) रोज़गार नहीं दिया, कारखाना नहीं लगाया, गरीबी नहीं हटाया वो अगले 5 साल क्या करेगा।राजद ने आज रोहतास की सभा में सवर्ण जातियों के बारे आपत्तिजनक टिप्पणी की है। राजद ने ऊंची जातियों के 10 % आरक्षण का भी विरोध किया था।तेजस्वी के इस बयान पर जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि तेजस्वी पर जात-पात की राजनीति करने का आराेप लगाया।

सासारामः राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव के बयान पर बवाल हो गया है। जनता दल यूनाइटेड और भाजपा ने घेरा है। तेजस्वी के बयान पर राजनीतिक शुरू हो गई है। 

रोहतास के डेहरी में चुनाव प्रचार के दौरान राजद नेता ने कहा कि लालू जी के शासन में गरीब सीना तान के बाबू साहब के सामने चलते थे, जो कर्मचारी काम करेगा उसे सम्मान मिलेगा, जो गलत काम करेगा उसे सजा मिलेगी।... 15 साल जो व्यक्ति (नीतीश कुमार) रोज़गार नहीं दिया, कारखाना नहीं लगाया, गरीबी नहीं हटाया वो अगले 5 साल क्या करेगा।

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि स्वर्ण समाज से हमेशा नफरत करने वाले राजद के नेता प्रतिपक्ष तेजश्वी यादव द्वारा आज रोहतास की सभा में राजपूत समाज पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी की घोर भर्त्सना करता हूँ। राजद ने आज रोहतास की सभा में सवर्ण जातियों के बारे आपत्तिजनक टिप्पणी की है। राजद ने ऊंची जातियों के 10 % आरक्षण का भी विरोध किया था।

तेजस्वी के इस बयान पर जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि तेजस्वी पर जात-पात की राजनीति करने का आराेप लगाया। उन्होंने कहा तेजस्वी ध्रुवीकरण करना चाहते हैं। रघुवंश प्रसाद को अपने जीवन के अंत में यंत्रणा के जरिए मौत की गोद में सोने के लिए विवश किया गया। उनके मरने के बाद भी उनके खिलाफ उनकी पार्टी के नेताओं ने बात की। दूसरी तरफ दलितों और अति पिछड़ी जातियों से उनका फासला बढ़ा है। उन्हें लालू, राबड़ी और इनके 18 महीने के कार्यकाल में आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया।

तेजस्वी ने कहा कि कमर तोड़ महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी से आम आदमी त्राहिमाम कर रहा है। काम-धंधा ठप है। किसान,मज़दूर,नौजवान और व्यापारी वर्ग को खाने के लाले पड़ रहे है। छोटे व्यापारियों को BJP सरकार ने मार दिया है। महंगाई बढ़ने पर ये लोग प्याज़ का माला पहन कर घूमते थे अब हम उन्हें यह सौंप रहे है।

तेजस्वी ने नीतीश को थका हुआ बताया, जदयू और भाजपा ने किया पलटवार

राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थक चुके हैं और अब वह बिहार को संभाल पाने में सक्षम नहीं हैं, जिस पर प्रदेश में सत्तारूढ़ राजग में शामिल जद (यू) और भाजपा के नेताओं ने पलटवार करते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। तेजस्वी (31) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (69) की उम्र का संभवत: जिक्र करते हुए कहा कि वह थक चुके हैं जिस कारण वह कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाते हैं, चाहे वह कोरोना वायरस महामारी हो या मुजफ्फरपुर में ‘एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम’ (एईएस) का प्रकोप हो।

तेजस्वी ने ट्वीट कर आरोप लगाया, ‘‘आदरणीय नीतीश पूर्णत: ऊर्जाविहीन हो चुके हैं। उनकी पकाउ, थकाउ, उबाउ, बासी और घिसी—पिटी बातों से जनता पक चुकी है। थक चुके नीतीश कुमार जी वास्तविकता, तर्क और तथ्यों से भाग रहे हैं। बिहार के करोड़ों युवाओं का वर्तमान और भविष्य बर्बाद कर वो इतिहास के बासी पन्नों को पलट रहे हैं। ’’ तेजस्वी की इस टिप्पणी पर सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त करते हुए इसे ‘‘निरर्थक’’ करार दिया है।

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा, "नीतीश कुमार कई युवाओं की तुलना में अधिक ऊर्जावान हैं। वह दिन में 14-15 घंटे काम करते हैं, जो कई युवा नहीं कर पाएंगे ... उनके थक चुके होने की टिप्पणी किसी भी तर्क से परे है।'' नीतीश के विश्वासपात्र माने जाने वाले बिहार के जलसंसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने तेजस्वी पर निशाना साधते हुए कहा , ‘‘ मुख्यमंत्री कम से कम उनकी तरह 9वीं फेल नहीं हैं। वह (राजद नेता) सिर्फ व्यर्थ टिप्पणी कर रहे हैं।’’

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भी तेजस्वी की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि राजग के नेता हमेशा राज्य और देश के विकास के लिए ऊर्जा के साथ काम करते रहे हैं। तेजस्वी की इसी तरह की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने हाल ही में कहा था, "वह कहते हैं कि मैं थका हुआ हूं, उन्हें पहले जवाब देना चाहिए कि जब बिहार में कोरोना वायरस (संक्रमण) फैला तो वह कहां थे।" गौरतलब है कि मार्च महीने से तेजस्वी बिहार में अनुपस्थित थे। करीब दो महीने बाद मई के मध्य में दिल्ली से वह पटना लौटे थे। 

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