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भूपेंद्र पटेल: गुजरात में पाटीदार समुदाय से पांचवें मुख्यमंत्री

By भाषा | Updated: September 13, 2021 20:48 IST

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अहमदाबाद, 13 सितंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक भूपेंद्र पटेल ने सोमवार की अपराह्न जब गुजरात के नये मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तो वह 1960 में राज्य के गठन के बाद से इस शीर्ष पद को संभालने वाले पाटीदार समुदाय के पांचवें नेता बन गए जो इस प्रभावशाली समुदाय के दबदबे को दर्शाता है।

इकसठ साल पहले राज्य के गठन के बाद से गुजरात में कुल 17 मुख्यमंत्री हुए हैं जिनमें से पांच पटेल समुदाय से हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात में भूपेंद्र पटेल (59) ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी ऐसे समय संभाली है जब राज्य में विधानसभा चुनाव होने में लगभग सवा साल का समय बचा है। सत्ताधारी भाजपा द्वारा शीर्ष पद के लिए पटेल को चुना जाना एक आश्चर्य के तौर पर सामने आया।

भाजपा की ओर से उन्हें मुख्यमंत्री बनाये जाने को पार्टी द्वारा 2022 के चुनाव से पहले पाटीदारों को लुभाने और गुजरात पर अपनी पकड़ बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जहां भाजपा दो दशक से अधिक समय से शासन में है।

भूपेंद्र पटेल से पहले, पाटीदार या पटेल समुदाय से जो चार अन्य मुख्यमंत्री हुए हैं उनमें आनंदीबेन पटेल, केशुभाई पटेल, बाबूभाई पटेल और चिमनभाई पटेल शामिल हैं।

अन्य अधिकांश मुख्यमंत्री जैसे मोदी और माधवसिंह सोलंकी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से थे। गांधीनगर में राजभवन में गुजरात के 17वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले भूपेंद्र पटेल पहली बार विधायक बने हैं और उन्हें आनंदीबेन पटेल का करीबी माना जाता है। आनंदीबेन पटेल ने राज्यव्यापी पाटीदार आरक्षण आंदोलन के हिंसक होने के बाद अगस्त 2016 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

दिवंगत चिमनभाई पटेल एक कांग्रेस नेता थे और वह गुजरात के पहले पाटीदार मुख्यमंत्री थे। उन्होंने जुलाई 1973 में पहली बार पद ग्रहण किया। उन्होंने फरवरी 1974 में 'नवनिर्माण आंदोलन' के परिणामस्वरूप इस्तीफा दे दिया था, जो कॉलेज के छात्रों द्वारा छात्रावास भोजन बिल में वृद्धि के खिलाफ शुरू किया गया एक आंदोलन था।

अक्टूबर 1990 में चिमनभाई पटेल एक बार फिर मुख्यमंत्री बने और फरवरी 1994 तक इस पद पर रहे। जनता मोर्चा और जनता पार्टी के नेता दिवंगत बाबूभाई जसभाई पटेल ने भी दो बार मुख्यमंत्री का पद संभाला। उनका पहला कार्यकाल जून 1975 से मार्च 1976 के बीच था। उन्होंने अप्रैल 1977 से फरवरी 1980 तक फिर से पद ग्रहण किया।

दिवंगत केशुभाई पटेल गुजरात में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री थे। उन्होंने मार्च 1995 में विधानसभा चुनावों में भाजपा को निर्णायक बहुमत हासिल होने के बाद पद्भार ग्रहण किया था। हालांकि, केशुभाई पटेल ने सात महीने बाद इस्तीफा दे दिया था क्योंकि उनकी पार्टी के सहयोगी शंकरसिंह वाघेला ने उनके खिलाफ विद्रोह कर दिया था। वाघेला भाजपा की जीत के बाद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे।

वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में केशुभाई पटेल के नेतृत्व में भाजपा सत्ता में लौटी और वे एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। हालांकि, उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अक्टूबर 2001 में समय से पहले इस्तीफा दे दिया, जिससे मोदी के लिए मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ और मोदी ने 2014 तक यह पद संभाला।

मई 2014 में मोदी के गुजरात छोड़ने के बाद, भाजपा ने गुजरात की बागडोर आनंदीबेन पटेल को सौंपी जिन्होंने अहमदाबाद की घाटलोडिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्होंने अगस्त 2016 में भाजपा के नियम (पार्टी संविधान में उल्लिखित नहीं) का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया, जो 75 वर्ष से अधिक आयु के नेताओं को कोई भी महत्वपूर्ण पद पर संभालने से रोकता है।

आनंदीबेन पटेल के दावों के विपरीत, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना ​​​​था कि उन्होंने आंदोलनकारी पाटीदार समुदाय के गुस्से को शांत करने के लिए पद से इस्तीफा दिया था, जो समुदाय को ओबीसी दर्जा देने की मांग को स्वीकार नहीं करने को लेकर भाजपा से नाराज थे। वर्ष 2016 में, जब नितिन पटेल को शीर्ष पद के लिए एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा था, तब भाजपा ने विजय रूपाणी (जैन) को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना था। गुजरात की कुल आबादी में पाटीदार 13 से 14 फीसदी हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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