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असदुद्दीन ओवैसी का मोहन भागवत पर हमला, कहा- 'मुसलमानों को भारत में रहने की अनुमति देने वाले मोहन कौन होते हैं?'

By मनाली रस्तोगी | Updated: January 11, 2023 16:12 IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख ने मंगलवार को कहा कि मुसलमानों को भारत में डरने की कोई बात नहीं है, लेकिन उन्हें अपने "सर्वोच्चता के बड़बोलेपन" को छोड़ देना चाहिए।

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ठळक मुद्देअसदुद्दीन ओवैसी ने मोहन भागवत की टिप्पणी को लेकर उनपर निशाना साधा।भागवत ने कहा कि मुसलमानों को भारत में डरने की कोई बात नहीं है, लेकिन उन्हें अपने "सर्वोच्चता के बड़बोलेपन" को छोड़ देना चाहिए।

नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी को लेकर उनपर निशाना साधा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख ने मंगलवार को कहा कि मुसलमानों को भारत में डरने की कोई बात नहीं है, लेकिन उन्हें अपने "सर्वोच्चता के बड़बोलेपन" को छोड़ देना चाहिए।

ओवैसी ने सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए लिखा, "मुसलमानों को भारत में रहने या हमारे धर्म का पालन करने की "अनुमति" देने वाले मोहन कौन होते हैं? हम भारतीय हैं क्योंकि अल्लाह ने चाहा। उसने हमारी नागरिकता पर "शर्तें" लगाने की हिम्मत कैसे की? हम यहां अपने विश्वास को "समायोजित" करने या नागपुर में कथित ब्रह्मचारियों के समूह को खुश करने के लिए नहीं हैं।"

उन्होंने आगे लिखा, "मोहन कहते हैं कि भारत को कोई बाहरी खतरा नहीं है। संघी दशकों से "आंतरिक शत्रुओं" और "युद्ध की स्थिति" के हौवले का रोना रो रहे हैं और लोक कल्याण मार्ग में उनके स्वयं के स्वयंसेवक कहते हैं, "ना कोई घुसा है ..."। चीन के लिए यह "चोरी" और साथी नागरिकों के लिए "सीनाजोरी" क्यों? यदि हम वास्तव में युद्ध में हैं, तो क्या स्वयंसेवक सरकार 8+ वर्षों से सो रही है?"

ओवैसी ने ये भी लिखा, "आरएसएस की विचारधारा भारत के भविष्य के लिए खतरा है। भारतीय असली "आंतरिक शत्रुओं" को जितनी जल्दी पहचान लें, उतना ही अच्छा होगा। कोई भी सभ्य समाज धर्म के नाम पर इस तरह की नफरत और कट्टरता को बर्दाश्त नहीं कर सकता. मोहन को हिन्दुओं का प्रतिनिधि किसने चुना? 2024 में चुनाव लड़ रहे हैं? स्वागत है।"

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "ऐसे बहुत से हिंदू हैं जो आरएसएस के वर्चस्व की उद्दाम बयानबाजी को महसूस करते हैं, हर अल्पसंख्यक कैसा महसूस करता है, यह तो दूर की बात है। यदि आप अपने ही देश में विभाजन पैदा करने में व्यस्त हैं तो आप दुनिया के लिए वसुधैव कुटुम्बकम नहीं कह सकते।"

टॅग्स :असदुद्दीन ओवैसीमोहन भागवतआरएसएस
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