लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं. ऐसे में हर राजनीतिक दल अपने वोट बैंक में इजाफा करने के लिए अभी से तरह-तरह के जतन करने लगे हैं. अचानक ही तमाम महापुरुषों के जन्मदिन आदि पर राजनीतिक दल उनके योगदान को जनता के बीच प्रचारित करने में जुट गए हैं. बीती मार्च में यूपी की जनता ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम की जयंती पर 15 मार्च को तमाम राजनीतिक दलों को कार्यक्रम करते हुए देखा.
इसी क्रम में अब समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने 14 अप्रैल को बाबा साहब डा.भीमराव अंबेडकर की जयंती पर गांव-गांव में कार्यक्रम करने का फैसला किया है. प्रदेश के सभी सेक्टर और गांवों में होने वाले इन कार्यक्रमों के जरिए सपा नेता बाबा साहब के लिखे संविधान को बचाने और उसकी मूल भावना को समझाने का प्रयास करेंगे. अखिलेश यादव को उम्मीद है कि पार्टी के इस प्रयास से दलित समाज को अपने साथ जोड़ने में उन्हें सफलता मिलेगी.
सपा नेता गांव-गांव जाकर लोगों को करेंगे जागरूक
इसी सोच के तहत शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने 14 अप्रैल पर अंबेडकर जयंती पर बाबा साहब के संविधान को बचाने और उसकी मूल भावना को समझाने के लिए जन-जागरण अभियान चलाए जाने का ऐलान किया. अखिलेश यादव का कहना है कि बाबा साहब के द्वारा दिए गए संविधान की रक्षा करना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि आज देश में ऐसे हालात बनाए जा रहे हैं, जिनसे संविधान की आत्मा को कमजोर किया जा सके. इसलिए सभी को आगे आकर सरकार के संविधान विरोधी कार्यों को लेकर आवाज उठानी होगी.
अखिलेश के अनुसार, केंद्र और प्रदेश की सत्ता पर काबिज लोग संविधान से नहीं, मन विधान से चलने वाले लोग है. जबकि हम लोकतंत्र को मजबूत करते हुए एकतंत्र लाना चाहते हैं. इसी के मद्देनजर पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे और संविधान के महत्व पर चर्चा करेंगे. सपा बाबा साहब और डॉ. राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों और आदर्शों पर चलते हुए सपा समाज में बराबरी, न्याय और समरसता स्थापित करना चाहती है.
इसी सोच के तहत अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि सभी लोग अंबेडकर जयंती को सामाजिक एकता और जागरूकता का अभियान बनाएं. ताकि दलित समाज को साथ लेकर सूबे के भाजपा की सत्ता को हटाया जा सके. कुछ इसी तरह का कार्यक्रम बीते मार्च में कांशीराम की जयंती पर सपा ने किया था.
दलित वोट बैंक को साथ लाने की हो रही जंग
यहीं वजह है कि अब ये कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव की निगाह प्रदेश में दलित समुदाय के 22 फीसदी वोट बैंक पर जम गई है. कुछ समय पहले तक इस वोटबैंक पर बसपा का कब्जा था. दलित समाज के लोग बसपा को ही अपना हितैषी मानकर उसे वोट करते थे, लेकिन मायावती के यूपी की राजनीति में कमजोर होने के चलते दलित समाज का वोट बिखर रहा है. इसी वजह से मायावती न सिर्फ यूपी बल्कि देश भर में हर चुनाव हार रही हैं.
वर्ष 2012 के बाद से मायावती को कोई बड़ी सफलता अपने दम पर हासिल नहीं हुई. सपा के साथ गठबंधन करने पर ही उन्हे 10 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने सपा से नाता तोड़ लिया और वर्तमान में उनके पास विधानसभा में सिर्फ एक ही सीट है. विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा में उनके पास एक भी सीट नहीं है. यही वजह है कि अब भाजपा, कांग्रेस और सपा सभी दल दलित समाज का वोट पाने के लिए प्रयास कर रहे हैं.
इसी क्रम में सपा ने शुक्रवार को अंबेडकर जयंती पर किए जाने वाले कार्यक्रम का ऐलान कर दिया है. अब जल्दी ही कांग्रेस और भाजपा भी अपनी कार्यक्रमों का ऐलान करेगी. जबकि मायावती ने लखनऊ में अंबेडकर जयंती पर भीड़ जुटाकर अपनी ताकत दिखने का फिर से प्रयास करेंगे ताकि उनके दलित वोटबैंक में कोई सेंध ना लगा सके.