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पीएफआई और सहयोगी संगठन पर बैन के बाद इसके वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने की तैयारी, जारी किए गए निर्देश

By विनीत कुमार | Updated: September 28, 2022 14:34 IST

पीएफआई और इसके सहयोगी संगठनों पर बैन के बाद अब कार्रवाई इन संगठनों से जुड़े वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी की जा रही है। सभी के वेबसाइट, यूट्यूब चैनल, सोशल मीडिया अकाउंट आदि को ब्लॉक किया जा रहा है।

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ठळक मुद्देपीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों के वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट. यूट्यूब चैनल आदि को किया जाएगा ब्लॉक।इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने की प्रकिया संगठनों पर पांच साल के बैन के बाद शुरू कर दी गई।फेसबुक और ट्विटर सहित सोशल मीडिया कंपनियों को सामग्री को हटाने के लिए निर्देश भेजे जा रहे हैं।

नई दिल्ली: पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और इसके सहयोगी 8 संगठनों पर यूएपीए के तहत पांच साल का बैन लगाने के बाद अब केंद्र ने इन संगठनों से जुड़े वेबसाइट और सोशल मीडिया खातों को भी ब्लॉक करने के निर्देश दे दिए हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार ने ऐसे निर्देश इसलिए दिए हैं ताकि प्रतिबंधिक संगठन इन माध्यमों से अपना प्रोपोगैंडा और गतिविधियों को नहीं फैला सके।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पीएफआई, रिहैब इंडिया फाउंडेशन (आरआईएफ), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (एआईआईसी), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (एनसीएचआरओ), नेशनल वुमंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन (केरल) से जुड़े सभी ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम अकाउंट, यूट्यूब चैनल को ब्लॉक करने के निर्देश दिए गए हैं। उनके द्वारा पोस्ट की गई सामग्री को भी हटाया जा रहा था।

खबर लिखे जाने तक पीएफआई, आरआईएफ और एआईआईसी की वेबसाइटों को ब्लॉक कर दिया गया था। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि दूरसंचार विभाग के आदेश पर अन्य प्लेटफॉर्म और अकाउंट्स को ब्लॉक करने की प्रक्रिया चल रही है।

अधिकारी ने कहा कि फेसबुक और ट्विटर सहित सोशल मीडिया कंपनियों को पीएफआई से संबंधित अकाउंट या किसी भी सामग्री को हटाने के लिए निर्देश भेजे जा रहे हैं।

एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि पीएफआई, सीएफआई, आरआईएफ और अन्य संगठनों से जुड़े वाटसेप खातों की निगरानी की जाएगी और किसी भी राष्ट्र विरोधी गतिविधि पर कार्रवाई होगी। अधिकारी ने कहा कि अगर पीएफआई या उसका कोई सहयोगी अपनी गतिविधियों के लिए कोई प्रॉक्सी सोशल मीडिया अकाउंट या वेबसाइट खोलता है, तो उसे भी ब्लॉक किया जा सकता है।

लंबे समय से एजेंसियों की रडार पर था पीएफआई

पीएफआई पर लंबे समय से हिंसक कृत्यों में शामिल होने, संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को उकसाने और आईएसआईएस सहित वैश्विक आतंकवादी संगठनों के साथ संबंध होने का आरोप लगता रहा है। सोलह साल पुराने इस समूह के खिलाफ हाल में 22 सितंबर और फिर 27 सितंबर को छापेमारी की गई थी। इस दौरान सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

गृह मंत्रालय की ओर से मंगलवार देर रात जारी एक अधिसूचना के अनुसार, पीएफआई के कुछ संस्थापक सदस्य ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया’ (सिमी) के नेता हैं और पीएफआई के जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से भी जुड़े हैं। जेएमबी और सिमी दोनों ही प्रतिबंधित संगठन हैं। अधिसूचना में कहा गया कि पीएफआई के ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया’ (आईएसआईएस) जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ संबंधों के भी कई मामले सामने आए हैं। 

अधिसूचना में दावा किया गया कि पीएफआई और उसके सहयोगी या मोर्चे देश में असुरक्षा होने की भावना फैलाकर एक समुदाय में कट्टरता को बढ़ाने के वास्ते गुप्त रूप से काम कर रहे हैं, जिसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि पीएफआई के कुछ कार्यकर्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए हैं। 

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