लखनऊः उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी दफ्तरों में पान मसाला और तंबाकू खाने और सिगरेट पीने पर रोक लगी हुई हैं. मायावती के शासनकाल में बापू भवन, एनेक्सी भवन, जवाहर भवन और इंदिरा भवन आदि के परिसर में किसी अधिकारी/कर्मचारी को पान मसाला, तंबाकू खाते हुए और सिगरेट हुए पकड़े जाने पर पांच सौ रुपए जुर्माना भरने का आदेश जारी किया गया.
तब कई अधिकारियों और कर्मचारियों को यह जुर्माना भरना भी पड़ा था. यहीं नहीं उसी दरमियान स्कूलों के नजदीक सिगरेट और पान मसाला बेचने पर रोक लगाने और सार्वजनिक स्थलों पर सिगरेट पीने पर जुर्माना वसूलने के निर्देश नगर निगम के अफसरों को दिए गए थे. यह सारे कदम सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार, उत्पादन, आपूर्ति व वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003 के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते दिए गए थे. परंतु मायावती के सत्ता से जाने के बाद इस दिशा में किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया.
इसका परिणाम यह हुआ करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए सरकारी दफ्तरों की दीवारे पान मसाला और तंबाकू की पीक से रंगी हुई दिखाई देने लगी. सूबे के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने बीते दिनों सचिवालय भवनों की गंदी दीवारों का संख्या लिया. और उन्होंने सभी सरकारी कार्यालयों को तंबाकू मुक्त घोषित करने के साथ ही स्कूल-कॉलेजों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं.
सिगरेट-तंबाकू पर रोक के लिए दिए निर्देश
सचिवालय भवनों में सिगरेट पीने और तंबाकू तथा पान मसाला खाने पर रोक लगाने के लिए मायावती सरकार के आदेश जारी करने के करीब पंद्रह साल बाद मुख्य सचिव एसपी गोयल से अब यह कहा है कि हम सबको सिगरेट-तंबाकू के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी. सभी सरकारी दफ्तर सिगरेट- तंबाकू से मुक्त करना होगा.
सरकारी दफ्तरों को साफ रखना होगा. तंबाकू के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत सरकारी दफ्तरों को सिगरेट-तंबाकू मुक्त करते हुए बच्चों के साथ मिलकर करनी होगी. इस क्रम में प्राथमिक स्तर से ही इसके दुष्प्रभाव पढ़ाई और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में शामिल किए जाएं.
इसके अलावा तंबाकू विक्रेताओं की लाइसेंसिंग व्यवस्था को सख्ती से लागू करने और दो तंबाकू दुकानों के बीच न्यूनतम 500 मीटर की दूरी सुनिश्चित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाए. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में दिए गए.
बैठक में सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार, उत्पादन, आपूर्ति व वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा भी हुई. इसके बाद मुख्य सचिव एसपी गोयल ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में तंबाकू विरोधी विशेष अभियान चलाया जाए,
ताकि बच्चों और युवाओं में इसके नुकसान को लेकर शुरुआती समझ विकसित हो सके. अब किसी भी शैक्षणिक संस्थान को मान्यता देते समय ‘तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान’ के दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से कराया जाए. युवाओं में तंबाकू के बढ़ते आकर्षण को रोकने के लिए संस्थानों में ऐसे प्रचार अभियान चलाए जाएं,
जो तंबाकू के तथाकथित ग्लैमर को खत्म करें. इसी बैठक में सभी सरकारी कार्यालयों को तंबाकू मुक्त घोषित करने के निर्देश दिए गए. यह भी कहा गया कि सचिवालय में पान मसाला और तंबाकू खाकर दीवारों गंदी करने वाले व्यक्ति से जुर्माना वसूला जाए. इस संबंध में सचिवालय प्रशासन को कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया.
इसके साथ ही मुख्य सचिव ने कहा है कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी मेडिकल और डेंटल कालेजों में तय समय सीमा के भीतर तंबाकू निषेध केंद्र स्थापित किए जाएं. सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी हर अवसर पर लोगों को तंबाकू न सेवन करने की संक्षिप्त लेकिन प्रभावी सलाह जरूर दें. ताकि तंबाकू के दुष्परिणामों से लोगों को बचाया जा सके.