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बांग्लादेश से आए तबलीगी जमात के 11 सदस्यों को स्वदेश भेजा गया

By भाषा | Updated: March 21, 2021 13:14 IST

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भदोही (उत्तर प्रदेश), 21 मार्च बांग्लादेश से भारत आये तबलीगी जमात के 11 लोगों को काली सूची में डालने के साथ ही, सभी को एक साल बाद उनके देश रवाना कर दिया गया है।

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि सभी विदेशी नागरिकों को एक बस से, भदोही पुलिस की एक टीम के साथ शनिवार को यहाँ से भेजा गया है। पुलिस टीम सभी को कोलकाता के रास्ते से 24 परगना जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पार कराने के बाद वापस लौटेगी।

उन्होंने बताया कि देश में पिछले साल कोरोना वायरस महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में तबलीगी जमात के लोगों के इकट्ठा होने पर मचे बवाल के बाद पुलिस ने एक ख़ुफ़िया जानकारी पर 31 मार्च को भदोही शहर के काजीपुर मुहल्ले में एक व्यक्ति के निजी गेस्ट हॉउस पर छापा मार कर तबलीगी जमात के बांग्लादेश के 11 , बंगाल के एक और असम के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया था।

पुलिस अधीक्षक राम बदन सिंह ने बताया की ये सभी ग्यारह बांग्लादेशी नागरिक पिछले साल तीन मार्च को दिल्ली से आए थे और चार मार्च से यहाँ रुके हुए थे। टूरिस्ट वीज़ा पर आये सभी 11 बांग्लादेशी नागरिकों को धर्म का प्रचार -प्रसार करने सहित अन्य वीज़ा नियमों के उल्लंघन के आरोप में पकड़ा गया था।

उन्होंने बताया कि इस मामले में तीन भारतीय और 11 बांग्लादेशी नागरिकों तथा इन्हें संरक्षण देने वालों कुल 21 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इनमें से तीन को ज़मानत पर छोड़कर सभी सात स्थानीय तबलीगी जमात के लोगों को क्लीन चिट मिली थी। बांग्लादेशी नागरिकों को पहले चौदह दिन अलग रखे जाने के बाद कोरोना निगेटिव होने पर जिला जेल भेज दिया गया जहाँ चार माह तक सभी जेल में बंद थे।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर सभी को पुलिस की कड़ी सुरक्षा में यहाँ तबलीगी जमात के संचालनकर्ता के निजी गेस्ट हाउस में तब से रखा गया।

पुलिस अधीक्षक के मुताबिक उच्च न्यायालय के एक निर्देश के बाद यहाँ जेल में बंद तबलीगी जमात के सभी सदस्यों को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया और मामले की सुनवाई लखनऊ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चली, जहाँ इन सभी पर प्रत्येक पर 1500-1500 रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश देने के साथ साथ अदालत ने यह भी कहा कि चूँकि यह लोग अपनी सज़ा पूरी कर चुके हैं इसलिए इनको वापस भेज दिया जाए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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