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लोकसभा में पेश हुआ सवर्ण आरक्षण संशोधन बिल, पढ़ें इसके प्रावधान

By स्वाति सिंह | Updated: January 8, 2019 12:59 IST

भाजपा नीत राजग सरकार शिक्षा एवं नौकरियों में आर्थिक तौर पर कमजोर वर्गों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान लागू करने से जुड़ा विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश कर सकती है।

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लोकसभा चुनावों से पहले एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने ‘‘आर्थिक रूप से कमजोर’’ तबकों के लिए नौकरियों एवं शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण को सोमवार को मंजूरी दे दी। मंगलवार दोपहर 12. 30 बजे यह बिल लोकसभा में पेश हुआ  है। बताया जा रहा है कि दोपहर दो बजे इस बिल पर लोकसभा में बहस होगी। बीजेपी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर मंगलवार को संसद में मौजूद रहने को कहा है। भाजपा नीत राजग सरकार शिक्षा एवं नौकरियों में आर्थिक तौर पर कमजोर वर्गों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान लागू करने से जुड़ा विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश कर सकती है। इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी है। 

भाजपा के समर्थन का आधार मानी जाने वाली अगड़ी जातियों की लंबे समय से मांग थी कि उनके गरीब तबकों को आरक्षण दिया जाए।  केंद्र सरकार के फैसले पर मंगलवार को लोकसभा में गहन चर्चा देखने को मिल सकती है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार इस आदेश को मंजूरी दिलाने के लिए संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है। इस बात के संकेत इससे भी मिलते हैं कि बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है। यही नहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सांसदों से मौजूदगी के लिए कहा है 

अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में करने होंगे संशोधन  

प्रस्तावित आरक्षण अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) को मिल रहे आरक्षण की 50 फीसदी सीमा के अतिरिक्त होगा, यानी ‘‘आर्थिक रूप से कमजोर’’ तबकों के लिए आरक्षण लागू हो जाने पर यह आंकड़ा बढकर 60 फीसदी हो जाएगा।

इस प्रस्ताव पर अमल के लिए संविधान संशोधन विधेयक संसद से पारित कराने की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में जरूरी संशोधन करने होंगे।

एक केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विधेयक एक बार पारित हो जाने पर संविधान में संशोधन हो जाएगा और फिर सामान्य वर्गों के गरीबों को शिक्षा एवं नौकरियों में आरक्षण मिल सकेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक मौलिक अधिकारों के प्रावधानों के तहत अगड़ी जातियों के लिए आश्रय प्रदान करेगा। आरक्षण पर अधिकतम 50 फीसदी की सीमा तय करने का न्यायालय का फैसला संविधान में संशोधन का संसद का अधिकार नहीं छीन सकता।’

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